यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 365, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंबत्तीसवां अध्याय तदेवाग्निस्तदादित्यस्तद्वायुस्तदु चन्द्रमाः. तदेव शुक्रं तद् ब्रह्म ता आपः स प्रजापतिः.. (१) परम पुरुष ही अग्नि है. वही आदित्य है. वही वायु है. वही चंद्रमा, प्रकाशमान व ब्रह्मज्ञानी है. वही जल और वही प्रजापति है. ( १ ) सर्वे निमेषा जज्ञिरे विद्युतः पुरुषादधि. नैनमूर्ध्वं न तिर्यञ्चं न मध्ये परि जग्रभत्.. (२) सारे काल उस परम पुरुष से ही यज्ञ में उत्पन्न हुए. उस से ऊपर कोई नहीं है. उस को ऊपर, बीच आदि से कोई भी पार नहीं पा सकते. ( २ ) न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम महद्यशः. हिरण्यगर्भ ऽ इत्येष मा मा हि ४ँ सीदित्येषा यस्मान्न जात ऽ इत्येषः.. (३) उस परम पुरुष की कोई प्रतिमा ( सानी ) नहीं है. आप का यश महान है. आप का नाम अत्यंत महान् है. ‘हिरण्यगर्भ’, ‘मा हिंसीत्’, ‘यस्मान् जात’ इत्यादि मंत्रों में उस परम पुरुष की प्रशंसा और नाम का बारंबार वर्णन किया गया है. ( ३ ) एषो ह देवः प्रदिशोनु सर्वाः पूर्वो ह जातः स उ गर्भे अन्तः. स एव जातः स जनिष्यमाणः प्रत्यङ् जनास्तिष्ठति सर्वतोमुखः.. (४) वह परम पुरुष सभी प्रदेशों में व्याप्त है. वह पूर्व और अंत में भी व्याप्त है. वही उत्पन्न हुओं में विद्यमान है. वही उत्पन्न हो रहे प्राणियों में भी विद्यमान है. वही जन्म लेने वालों में भी व्याप्त होगा. वह सभी में सर्वविधि व्याप्त है. ( ४ ) यस्माज्जातं न पुरा किं चनैव य ऽ आबभूव भुवनानि विश्वा. प्रजापतिः प्रजया स ४ँ रराणस्त्रीणि ज्योती ४ँ षि सचते स षोडशी.. (५) जिस से पहले कोई उत्पन्न नहीं हुआ, उस परमात्मा से सभी लोक उत्पन्न हुए हैं. वह परम पुरुष प्रजा के साथ रहते हैं. वह परम पुरुष तीन ज्योतियों को धारते हैं. प्रजा के साथ रहने वाले प्रजापति सोलह कलाओं वाले हैं. ( ५ ) येन द्यौरुग्रा पृथिवी च दृढा येन स्वः स्तभितं येन नाकः. यो अन्तरिक्षे रजसो विमानः कस्मै देवाय हविषा विधेम.. (६) यजुर्वेद - ३६५