१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ
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शरभोपनिषत् [ ४१७ करने का फल मिल जाता है। वह समस्त महापातक और उपपातकों से छुटकारा पाकर पवित्र हो जाता है। इस प्रकार मुक्त होकर शिवजी का प्रिय होता है और शिव सायुज्य को प्राप्त करता है। उसका पुनरागमन नहीं होता—उसका पुनरागमन नहीं होता वह ब्रह्म हो जाता है। इस प्रकार ब्रह्माजी ने कहा, ऐसा यह उपनिषद् है ॥ ३६ ॥ ॥ शरभोपनिषत् समाप्त ॥