१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंगायत्री रहस्योपनिषत् ] [ ४६३ करे, वह सारे जन्म के पापों को नष्ट कर देता है। जो ब्राह्मण इस गायत्री रहस्य को पढ़े तो उसने मानों गायत्री मन्त्र को साठ हजार लाख बार जप लिया है। उसने सारे वेदों का अध्ययन कर लिया। सभी तीर्थों में उसने स्नान कर लिया। न पीने लायक (शराब आदि) को पीने से जो पाप होता है उससे भी मुक्त हो जाता है। न खाने लायक को खाने से हुए पाप से मुक्त हो जाता है। ब्रह्मचारी न भी हो तो ब्रह्मचारी के समान तेजस्वी हो जाता है। पंक्तियों में हजार बार (अपेय) पान कर पवित्र हो जाता है। तथा आठ ब्राह्मणों को इसका ग्रहण करवाकर, बताकर समझाकर ब्रह्मलोक को चला जाता है। ये सब भगवान् (प्रजापति) ब्रह्मा ने इस प्रकार उत्तर देकर समझाया। ॥ गायत्री रहस्योपनिषद् समाप्त ॥ —:o:—