१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविद्युत हैं वहीं गरजन करने वाले बादल हैं। वे दोनों एक योनि हैं, एक युग्म हैं। सविता किसे कहते हैं और सावित्री किसे ? सूर्य को सविता कहते हैं और द्युलोक को सावित्री। जहां सूर्यदेव हैं वहीं द्युलोक हैं, जहां द्युलोक हैं, वहीं सूर्यदेव हैं। वे दोनों योनि हैं, एक युग्म हैं। सविता किसे कहते और सावित्री किसे ? चन्द्रदेव को ही सविता कहते हैं और नक्षत्र को सावित्री। जहां चन्द्रदेव हैं वहीं नक्षत्र हैं। जहाँ नक्षत्र हैं वहीं चन्द्रदेव हैं। वे दोनों एक योनि हैं, एक युग्म हैं। सविता किसे कहते हैं और सावित्री किसे ? मन को ही सविता कहा गया है और वाणी को सावित्री, जहाँ मन है वहीं वाणी है, जहाँ वाणी है वहीं मन है। वे दोनों एक योनि हैं, एक युग्म हैं। सविता किसे कहते हैं और सावित्री किसे ? पुरुष को ही सविता कहा गया है और स्त्री को सावित्री। जहाँ पुरुष है वहीं स्त्री है, जहाँ स्त्री है वहीं पुरुष है। वे दोनों एक योनि हैं। एक युग्म हैं ॥ १-६ ॥ तस्या एव (ष) प्रथमः पादो भूस्तत्सवितुर्वरेण्यमित्यग्नि- र्वै वरेण्यमापो वरेण्यं चन्द्रमा वरेण्यम् ॥ १० ॥ तस्या एव (ष)- द्वितीयः पादो भर्गमयो भुवो भर्गो देवस्य धीमहीत्यग्निर्वै भर्ग आदित्यो वै भर्गश्चन्द्रमा वै भर्गः ॥ ११ ॥ तस्या एष तृतीयः पादः स्वधियो यो नः प्रचोदयादिति स्त्री चैव पुरुषश्च प्रजयनतः ॥ १२ ॥ यो वा एतां सावित्रीमेवं वेद स पुनर्मृत्युं जयति ॥ १३ ॥ सावित्री का पहला पाद—'भूः—तत्सवितुर्वरेण्यम' है। अग्नि, जल व चन्द्रमा देवता ही वरेण्य हैं। सावित्री का दूसरा पाद है 'भुवः— भर्गो देवस्य धीमहि' वह तेजोमय है। अग्नि, सूर्य व चन्द्रमा देवता ही वह भर्ग तेज हैं। सावित्री का तीसरा पाद है 'धियो योनः प्रचोदयात्।'