भारतकोश
१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ

पृष्ठ 64, कुल 572 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 64

( ५६ ) CC0. In Public Domain. Digitization by eGangotri सब कुछ ब्रह्म ही है..................अतः जो ब्रह्म को भय रहित एवं उपरोक्त गुणों से सम्पन्न जानता है वह ज्ञानी भय रहित होता है और ब्रह्म ही बन जाता है।” —नृसिंहोत्तरतापनीयोपनिषद् “जो इस नरसिंह चक्र को जानता है, वह सभी वेदों का अध्ययनकर्त्ता समझा जाता है। वह सभी यज्ञों का कर्त्ता समझा जाता है। उसने सभी तीर्थों में स्नान कर लिया। उसे सभी मन्त्रों की सिद्धियां भी प्राप्त हो जाती हैं। वह सर्वत्र शुद्ध हो जाता है। सब की रक्षा करता है। भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी, बेताल आदि भयङ्कर योनियों का नाश करने वाला भी वह होता है और सब प्रकार निर्भय हो जाता है।” —नरसिंहषट्चक्रोपनिषद् मनुष्यो ! इन भगवान नीलकंठ का दर्शन करो। यही भगवान रुद्र हैं, जो जल में, औषधियों में निहित होकर रोग रूप पापों को नष्ट करते हैं। यह प्राणियों के लिए प्राण रूप हैं। तुम्हारे अमङ्गल को नष्ट करने के लिये और अप्राप्त कामनाओं को पूर्ण कराने के लिये तुम्हारे निकट पधारें।” —नीलरुद्रोपनिषद् “जो इस विद्या का अमावस्या के दिन अध्ययन करता है, उसे सारे जीवन भर सांप नहीं काटते।...........मन से ही बिष को मुक्त किया जा सकता है।” —गरुड़ोपनिषद् Sri Sri Anandamayee Ashram Collection, Varanasi