१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)
1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंझांसी के गुस्सैल जबड़े में पचहत्तर अंग्रेज पुरूषों, बारह महिलाओं और तेईस बच्चों की विद्रोहियों ने बलि ली। 4 जून को झांसी ने विद्रोह किया और 8 जून को अंग्रेजी राज्यसत्ता का झांसी से अंत हो गया। और अंग्रेजों की ओर से अपने को वारिस कहनेवाला कोई न बचने से विद्रोही सिपाहियों ने रानी साहब लक्ष्मीबाई को झांसी के स्वातंत्र्य सिंहासन पर प्रतिष्ठित किया और वीर रानी के नाम से नारा लगाया–‘‘खल्क खुदा का, मुल्क बादशाह का और शासन रानी लक्ष्मीबाई का।‘’⁹⁹
1857 का स्वातंत्र्य समर – 203
⁹⁹ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र पर एक ग्रंथ मराठी में श्री पारसनीस ने लिखा है। उस विद्वान ग्रंथकार ने सैकड़ों सबूतों से प्रस्तुत कर यह दिखाया है कि अंग्रेजों के इस हत्याकांड को उस युवा रानी ने रत्ती भर भी नहीं भड़काया था। श्री पारसनीस का ग्रंथ मराठी पाठकों के अच्छे परिचय का ग्रंथ है और उसका अन्या भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है और इसीलिए हमने उसे यहां उद्धृत किया है।