१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)
1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनिर्भरता' व्याप्त हो गई। उस शांति-निर्भयता के उत्पादक बैरकपुर के सिपाहियों और कलकत्ता में रह रहे अवध के नवाब के वजीर अली नक्की खान का उच्चाटन करने के लिए सरकार ने कमर कसी। 14 जून की रात को बैरकपुर के सिपाही विद्रोह करेंगे, यह समाचार उन्हीं में से एक के द्वारा मिलने पर 14 जून को विद्रोह होने के पूर्व ही उनको तोपखाने के सामने लाकर निःशस्त्र किया गया और 15 जून को अवध के नवाब और उसके वजीर को तत्काल जाकर 'राज्य की सुरक्षा' के लिए पकड़ा गया । उनके जनानखाने से लेकर सारी जगहों की छानबीन की गई; पर उसमें कुछ भी सबूत नहीं मिला। फिर भी नवाब और उसके वजीर को कलकत्ता के किले में कैद कर दिया गया। इस तरह कलकत्ता शहर में जमा हो रहा बारूद का भंडार चिंगारी पड़ने से पहले ही खाली कर दिया गया। बंगाल प्रदेश भर के सिपाहियों में क्रांति-रचना की गुप्त तैयारी करने वाला और कलकत्ता के एक निरुपद्रवी बाग में बैठकर अवध के राजसिंहासन को पुनः स्थापित करने के लिए इस विद्रोह का भयानक जाल बुननेवाले वजीर नक्की खान के किले में कैद होते ही बंगाल प्रांत की क्रांति का मानो सिर ही कट गया। किले में बंद होकर विद्रोहियों को गाली देनेवाले अंग्रेजों को वजीर ने एक बार साफ-साफ ही सुनाया- "हिंदुस्थान में रचा गया यह भयानक विद्रोह मेरी दृष्टि से न्यायिक है, अवध की स्वतंत्रता छीनने का यह जैसे-को-तैसा प्रतिशोध है। न्याय का राजमार्ग छोड़कर तुम धोखे और स्वार्थ के कंटीले रास्ते पर जान-बूझकर घुसे हो तो लहूलुहान होने लगो तो इसमें आश्चर्य क्या है? प्रतिशोध के बीज बोए-तब तुम हंस रहे थे, अब उसकी फसल पक गई है तो उसका दोष लोगों पर क्यों डालते हो?"108 यदि कलकत्ता को सन् 1857 के इस अति उग्र विद्रोह की ऐसी अधूरी, धुंधली और अस्पष्ट कल्पना थी तो कलकत्ता से आनेवाली डाक रिपोर्ट पर पूरी तरह अवलंबित इंग्लैंड देश की कल्पना पहले कितनी अज्ञानजनक सुरक्षा में सोई होगी और बाद में एकाएक ज्ञात होने पर कैसे भतबाधाग्रस्त बौराई-सी हो गई, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। पार्लियामेंट में बैरकपुर, रामपुर, दमदम आदि से विद्रोह के समाचार आने के बाद हिंदुस्थान की ओर सबकी आंखें लग गई थी। परंतु मध्यांतर में कुछ भी महत्त्वपूर्ण समाचार ज्ञात न होने से फिर से सबको सुरक्षित लगने लगा। तारीख 11 जून को पार्लियामेंट में हाउस ऑफ कॉमंस में कुछ सदस्यों के पूछे प्रश्नों पर प्रेसीडेंट बोर्ड ऑफ कॉमर्स के प्रमुख अधिकारी ने कहा- "बंगाल में हाल में घटित असंतोष से लोगों को घबराने का अब कोई कारण नहीं रह गया है। क्योंकि अपने आदरणीय और अभिजात मित्र लॉर्ड द्वारा दर्शाई गई तत्परता, कड़ाई और तुरत-फुरत कार्यवाही से सेना में 1857 का स्वातंत्र्य समर – 224 108 रेड पैंफलेट, पृष्ठ 106।