भारतकोश
१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 266, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 266

करके छापामार लड़ाई करने के विचार से अंग्रेजी सेना से दो अच्छी भिड़त हो जाने पर कुंवर सिंह जगदीशपुर के बाहर निकला और 14 अगस्त को आयर कुंवर सिंह के महल में तंबू गाड़कर बैठा। इस तरह जगदीशपुर यद्यपि अंग्रेजों के कब्जे में आ गया, उन्होंने जगदीशपुर के राजमहल, हिंदू मंदिरों और भवनों का नाश किया तो भी उस महल का राजा, उन मंदिरों का देवता, उन भवनों का मालिक योद्धा कुंवर सिंह इस लड़ाई के पहले जितना अजित था उतना ही लड़ाई के बाद भी अजित ही था। राजधानी जाते ही अन्य राजा भले हार जाते हों, पर इस जगदीशपुर के महल की बात वैसी नहीं थी। वहां वह वहां उसका जगदीशपुर-ऐसी उसकी प्रतिज्ञा होने से उसे पकड़े बिना केवल जगदीशपुर पकड़कर बैठना व्यर्थ था। उसने घर खोया, पर रणांगण ही उसका घर हो गया। 1857 का स्वातंत्र्य समर - 271