१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)
1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदो विभाग तुरंत इकट्ठा हो गए और अपनी पूरी सेना सहित कुंवर सिंह गंगा घाट के अधिक ही पास आ गया। अप्रैल की 17 तारीख को यह थकी हुई अंग्रेजी सेना अथुसिरवा गांग में सो गई। भोर होने पर जब डगलस आगे बढ़ा तो उसने देखा, विद्रोही उससे सत्रह मील आगे है। अतः वह सारा दिन अंग्रेजी घोड़े और तोपखाना विद्रोहियों की खोज में दौड़ता रहा। पर अंग्रेजी पैदल बहुत पीछे पड़ता रहा। तब कुंवर सिंह से चार मील पहले अंग्रेजी सेना एक नींद लेने लग गई। कुंवर के जासूस शत्रु की बात उड़ाने में अति कुशल थे। उन्होंने अंग्रेजों के सौ जाने का समाचार तत्काल कुंवर सिंह को दिया और कुंवर उठा-उसने शत्रु की नींद का लाभ लेने का निश्चय किया। वह अस्सी वर्ष का वृद्ध राजपूत अपनी सारी सेना के साथ उस आधी रात के अंधेरे में तुरंत निकला और सिंकदरपुर आ गया। घाघरा नहीं उतरा, गाजीपुर प्रदेश में घुसा और सीधे मनोहर शहर तक दौड़कर आया और अपनी थकी हुई, पस्त हुई भूखी सेना को कुछ विश्राम देने थोड़ा ठहर गया। कुंवर की सेना अब बहुत ही थक गई थी। मनोहर गांव का स्थान बहुत मजबूत न होते हुए भी उन्हें विश्राम के लिए ठहरना ही पड़ा। इस गांव में विद्रोही आगे जाना असंभव होने से ठहरे हुए हैं, यह सुनते ही डगलस दौड़ने लगा और 20 अप्रैल को मनोहर गांव आ पहुंचा। उस दिन उन थके हुए विद्रोहियों का जोर कम पड़ा और अंग्रेजी सेना ने उन्हें पराजित कर उनकी गाड़ियां-रसद छीन लीं। परंतु वह वृद्ध युवा या उसका धीरज नही हारा। पराजय का चिह्न देखते ही पहले से ही सोचा-समझा आदेश जारी हुआ। कुंवर की सेना पलक झपकते ही छोटी-छोटी टुकड़ियों में बंटकर रणक्षेत्र से तत्काल एक निश्चित समय पर निश्चित स्थान पर एकत्र होने हेतु अदृश्य हो गई। अंग्रेजी सेना इस संबंध में कुछ भी जान न सकी और अपनी विजय निष्फल देख वहीं ठह गई। कुंवर सिंह अपनी सेना के साथ गंगा पाट के बहुत नजदीक हो गया। वह गंगा के पाट के अधिकाधिक पास आ गया। भयानक स्पर्धा जीतकर गंगा पाट से भिड़ भ गया! पीछे अंग्रेजीसेना दौड़ती आ रही थी; परंतु उसका सामना करने की शक्ति या समय अब शेष नहीं था, इसलिए उस चतुर वृद्ध ने एक अलग ही युक्ति भिड़ाई। उसने यह अफवाह फैला दी कि नौका न मिलने से कुंवर सिंह की सेना हाथियों से बाल्टिला के पास गंगा पार होने वाली है। यह समाचार अंग्रेजी जासूसों द्वारा पकड़कर डगलस को सूचित करते ही वह प्रसन्नतापूर्वक अपने जासूसों पर गर्व करने लगा। अब कुंवर सिंह कहां जाएगा? उसका यह गुप्त समाचार मिल जाने से मैं उसके हाथी सहित नष्ट कर दूंगा। इसलिए अंग्रेजी सेना बाल्टिला के पास जाकर उस भारी हाथी की राह देखती रही। ओ शूरवीर ! मजे से छिपकर बैठो। तुम्हारी इस स्वनिर्मित कैद में तुम अटके पड़े हो और कुंवर सिंह का हाथी अब फिर आएगा, इसलिए तब तक नींद निकाल 1857 का स्वातंत्र्य समर — 340