भारतकोश
१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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लिया और तलवारों से उन्हें भी काट डाला। केवल तीन असामी पास के गन्ने के खेत में छिपे थे, इसलिए बचे। और इन तीन लोगों में ही अमर सिंह भी था। यहां से बचकर अमर सिंह की सेना कैमूर पर्वतों में घुस गई। उसके पीछे-पीछे अंग्रेजी सेना भी घुसी। इसलिए उस वर्तत के हर टीले और हर शिखर पर लड़ाई करते-करते पांडे लोगों की उस स्वातंत्र्य पूतना (पलटन) ने दिसंबर के अंत में रण में रक्त समाधि पाई। इस तरह बिहार प्रदेश के स्वतंत्रता समर की बहार उजड़ गई। फिर भी राजा अमर सिंह शत्रु के हाथ अभी तक नहीं आई। अंतिम वृत्तांत किसी को भी पता न चलने देकर सदेह स्वर्ग गमन की अनुमति कभी भूलोक के मनुष्यों को यदि स्वर्गलोक के देव, गंधर्व देते होंगे तो उस सम्मान के योग्य इस मर्त्य विश्व में केवल अमर सिंह ही था, यह निर्विवाद है।

1857 का स्वातंत्र्य समर – 347