भारतकोश
१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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पैसा दिया और जब बड़ी-बड़ी लड़ाइयों में अंग्रेजों के पास खाने को कुछ नहीं था तब उन्हें अनाज भिजवाया। नागपुर की तरह वहां क, ऐसी शिकायत नहीं थी। क्योंकि राजमहल औरस संतति से भरा हुआ था। वहां झांसी की तरह दत्तक का कोई भी बखेड़ा नहीं था; क्योंकि वर्तमान राजा दिवंगत राजा का औरस पुत्र था और राज्य पर शासनरूढ़ था। इस तरह लखनऊ के इस नवाब ने उपर्युक्त अपराधों में से एक भी अपराध नहीं किया था। यद्यपि ये सारे अपराध नवाब ने नहीं किए थे, फिर भी उस मूर्ख के हाथें एक बड़ा प्रमाद हो ही गया। वह प्रमाद यह कि नवाब के राज्य का प्रदेश बहुत ही उपजाऊ, सुंदर और धनी था। यह उसका अपराध अंग्रेजों के बहुत पहले से ही ध्यान में आया हुआ था। अवध के सुंदर प्रदेश का वर्णन करते हुए अंग्रेजी ब्लू बुक की सुकोमल भाषा में भी कविता फूट पड़ी है-"इस सुंदर प्रदेश में कहीं-कहीं बीस तो कहीं-कहीं दस फीट पर ही भरपूर जल भंडार हैं। सारा प्रदेश हरे-भरे खेतों से भरा हुआ है। अमराई की छाया से शीतल, बांस के ऊंचे-ऊंचे वन अपने सिर ठाट और शान से उठाए हुए, इमली की घनी छाया, नारंगी की गंध, अंजीर के वृक्षों की विचित्रता और पुष्पराग का परिमल आदि सारी प्रकृति की अवर्णनीय सुंदरता फैली हुई है।" ऐसा यह प्रदेश अपने कब्जे में रखने का प्रचंड अपराध अवध के नवाब ने किया था, इसलिए सन् 1849 में डलहौजी ने उसे गद्दी पर से उठाकर फेंक देने का आदेश दे दिया और उस आदेश को समस्त अंग्रेजों की अनुमति और सहयोग मिलने से अवध एक झटके में अधिग्रहीत कर ली गई। कारण यह बताया गया कि नवाब अपने राज्य में सुधार नहीं कर रहा था। ओहो! ईसा मसीह भी इस उदारता के आगे नतमस्तक हो जाएं। नवाब के राज्य में जो एक गुनी दरिद्रता थी उसे चौगुनी करने, जो कुछ चैतन्य था उसे समाप्त करने और अवध के तन पर फटा-पुराना ही सही, पर स्वतंत्रता का जो कपड़ा था उसे फाड़कर नंगा करने तथा उसके सिंहासन पर बलात्कार करनेवाले इंग्लैंड की यह अव्यवस्था की बात यदि एकबार मान ली तो हिंदुस्थान पर तेरा राज क्या एक दिन भी रह पाएगा? आज चीन में अफीम की लत है, अफगानिस्तान में अत्याचार है, बहुत क्या तेरे पैर के नीचे स्थित रशिया को अपने देश से जोड़ सकते हो? तेरे पड़ोसी के घर का सामान अव्यवस्थित है, इसलिए उसके घर में घुसकर उसे बांधकर वह घर अपने कब्जे में लेने का अधिकार तुम्हें कैसे मिला? पर डलहौजी के प्रशासन के संबंध में लिखनेवाला आर्नोल्ड कहता-"नवाब ने इसके सिवाय भी कितने ही अपराध किए थे। जैसे वह अपनी दासियों को जरी की साड़ियां भेंट देता था। देसरा अपराध यह कि उसने 11 मई को आतिशबाजी का जलसा किया। और यह भी कि एक दिन सुबह ही उसने दवाई पी और शाही बेगम और ताज बेगम से भोजन का आग्रह किया। अब इससे भयंकर 1857 का स्वातंत्र्य समर – 66