भारतकोश
अभिज्ञानशाकुन्तलम् (विमला-चन्द्रकला संस्कृत-हिन्दी व्याख्या सहित)

अभिज्ञानशाकुन्तलम् (विमला-चन्द्रकला संस्कृत-हिन्दी व्याख्या सहित)

Abhijnanashakuntalam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / डॉ. श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished540 पृष्ठ

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पृष्ठ 136

५४ | अभिज्ञानशाकुन्तलम्

राजा—भगवान् काश्यपः शाश्वते ब्रह्मणि स्थित इति प्रकाशः। इयं च वः सखी तदात्मजेति कथमेतत्।

अनसूया—सुणादु अज्जो। अत्थि को वि कोसिओत्ति गोत्तणामहेओ महाप्प-हावो राएसी। [शृणोत्वार्यः। अस्ति कोऽपि कौशिक इति गोत्रनामधेयो महाप्रभावो राजर्षिः।]

राजा—तद्वचसा सन्तुष्टः पृच्छति—भगवान्=ऐश्वर्यादिषड्गुणसम्पन्नः श्रीमान् काश्यपः शाश्वते ब्रह्मणि स्थितः = परब्रह्मणि नियोजितात्मा यद्वा नैष्ठिकब्रह्मचर्ये स्थितः, परिग्रह-साहित्यादूध्वंरेता इति यावत्, इति प्रकाशः = प्रसिद्धोऽयमर्थः। इयं = एषा च वः = युष्माकं सखी = आलिः शकुन्तला तदात्मजा = तस्यौरसी पुत्री इति = इदं भवतीभ्यां कथितम् एतत् = इदं कथं = केन प्रकारेण संगच्छते ? । तत्प्रकारः कथ्यतामिति भावः।

अनसूया—अथ शकुन्तलोत्पत्तिसम्बन्धिनीं कथां कथयितुमुपक्रमते = शृणोतु आर्यः = श्रीमान् आकर्णयतु अस्ति = आसीत् कोऽपि = कश्चित् कुशिकस्य गोत्रापत्यं पुमान् कौशिको विश्वामित्रः इति = एवं प्रकारेण गोत्रकृतं नामधेयं यस्यासौ गोत्रनामधेयः—वंशनामा। महाप्रभावः = विपुलप्रतापः राजर्षिः = राजा = नृपः ऋषिः मुनिरिव इति राजर्षिः।


**राजा—**भगवान् कण्वमुनि तो सदा से नैष्ठिक ब्रह्मचारी प्रसिद्ध हैं। आपकी सखी शकुन्तला उनकी पुत्री है ऐसा आप लोगों ने कहा ही है, तो यह बात कैसे? नैष्ठिक ब्रह्मचारी को यह पुत्री कैसे हुई ?

**विशेष—**शास्त्रों में भगवान् उन्हें कहा गया है, जिनके पास निम्नाङ्कित छह गुण हों—

'उत्पत्तिं प्रलयं चैव भूतानामागतिं गतिम्। वेत्ति विद्यामविद्यां च स वाच्यो भगवानिति ॥'

अथवा भग = ऐश्वर्य वाले को भगवान् कहते हैं। समग्र ऐश्वर्य, वीर्य, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य इन छह वस्तुओं का नाम भग है—

'ऐश्वर्यस्य समग्रस्य वीर्यस्य यशसः श्रियः। ज्ञान-वैराग्ययोश्चैव षण्णां भग इतीङ्गना ॥'

आत्मजा औरस पुत्री को कहते हैं, और नैष्ठिक ब्रह्मचारी विवाह न करने वाले ब्रह्मचारी को कहते हैं ? नैष्ठिक ब्रह्मचारी को औरस कन्या कैसे ? यह प्रश्न भद्र भाषा में उठाया गया है। राजा दुष्यन्त ने पहले तो महर्षि कण्व की विजातीय भार्या में शकुन्तला की उत्पत्ति की बात सोची थी, अब विवाह प्रसंग में कण्व के नैष्ठिक ब्रह्मचर्य में सन्देह करते हैं। जो एक धर्मात्मा राजा के लिए उचित ही है। यहाँ कण्व ऋषि को काश्यपवंश में उत्पन्न कहा गया है।

**अनसूया—**आर्य ! सुनिए, कौशिक नाम के महाप्रभावशाली राजर्षि थे।

**विशेष—**पुराणों के अनुसार ब्रह्मा के पुत्र कुश राजा के वंश में उत्पन्न होने के कारण विश्वामित्र को कौशिकी कहा जाता है, किन्तु महाभारत के अनुसार कान्यकुब्ज के राजा कुश के पुत्र गाधि के पुत्र विश्वामित्र हुए हैं।

'कान्यकुब्जे महानासीत् पार्थिवो भरतर्षभ !।
गाधीति विश्रुतो लोके कुशिकस्यात्मसंभवः॥
तस्य धर्मात्मनः पुत्रः समृद्धबलवाहनः।
विश्वामित्र इति ख्यातो बभूव रिपुमर्दनः ॥'

विश्वामित्र जी के महाप्रभाव की कथा पुराणों में प्रसिद्ध है—

तप के द्वारा राजर्षि से ब्रह्मर्षि हो जाना, अजीगर्त के पुत्र शुनःशेप की वरुण से रक्षा करना, त्रिशंकु को मानव शरीर से स्वर्ग भेजना तथा नई सृष्टि की रचना आदि उनके महाप्रताप के द्योतक हैं।