अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Abhijnanashakuntalam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Abhijnanashakuntalam with Sandarbhadipika Tika & Hindi Translation (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअस्मदीयम्
महाकवि कालिदास के अभिज्ञानशाकुन्तलम् की देवनागरी वाचना पर राघवभट्ट की “अर्थद्योतनिका” टीका प्रकाशित है तथा दाक्षिणात्य वाचना पर बहुत सारी टीकायें प्रकाशित हुई हैं। इनमें काटयवेम की कुमारगिरिराजीया, अभिराम की दिङ्मात्रदर्शिनी, श्रीनिवासाचार्य की व्याख्या, घनश्याम की सञ्जीवन-टिप्पण, अज्ञातकर्तृक चर्चा टीका गणमान्य हुई हैं। मैथिली वाचना पर शङ्कर एवं नरहरि की दो टीकायें भी प्रकाशित हुई हैं। लेकिन इस नाटक की बंगाली वाचना पर लिखी गयी एक भी टीका अद्यावधि प्रकाशित नहीं हुई थी। इस वाचना पर चन्द्रशेखर चक्रवर्ती ने टीका लिखी थी, किन्तु उसकी एक भी पाण्डुलिपि भारत में नहीं थी। आज यहाँ पर चन्द्रशेखर चक्रवर्ती की “सन्दर्भ-दीपिका” टीका का समीक्षित पाठसम्पादन प्रकाशित किया जाता है। यह क्षण एक अपूर्व उत्सव समान है। क्योंकि भारत में लिखी गयी, लेकिन आज इन्डिया ऑफिस लाईब्रेरी, लंदन के संग्रहालय की शोभा बढ़ा रही दो पाण्डुलिपियों के आधार पर उसीका प्रकाशन हो रहा है। ये दोनों पाण्डुलिपियाँ बंगलिपि में लिखी गयी हैं। उसका विनियोग डॉ. रिचार्ड पिशेल एवं डॉ. दिलीपकुमार काञ्जीलाल के द्वारा किया गया था। पिशेल ने इस टीका के कुछ अंश अपने प्रथम संस्करण में दिये थे। लेकिन अद्यावधि उसका साद्यन्त पाठ देवनागरी में लिप्यन्तरण करके समीक्षित संस्करण के रूप में प्रकाशित नहीं हुआ था। यह आज कालिदासानुरागियों के समक्ष प्रथम बार प्रकाशित हो रहा है।।
करीब एक सौ साल से ऐसा पूर्वाग्रह फैला हुआ है कि अभिज्ञानशकुन्तलम् का बंगाली वाचना में प्रवहमान पाठ प्रक्षेपों से भरा है और वह मौलिकता से बिछड़ा हुआ पाठ है। देवनागरी पाठ की ओर पक्षपात दिखानेवाले प्रॉफे. पी. एन. पाटणकर (1902), प्रॉफे. शारदारञ्जन राय (1908), और पण्डितप्रवर डॉ. रेवाप्रसाद द्विवेदीजी (1986) आदि विद्वानों ने बंगाली वाचना के पाठ की कड़ी आलोचना की है, और देवनागरी वाचना के पाठ को ही मूलभूत पाठ माना है। आज सारे भारतवर्ष में इस नाटक का पठन-पाठन देवनागरी वाचना के पाठ से ही चल रहा है।। लेकिन प्रॉफे. दिलीपकुमार काञ्जीलाल (1980)ने पहली बार बंगाली पाठ की आपेक्षिक प्राचीनता एवं मौलिकता का समर्थन अनेक प्रमाणों