भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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(१३६) अद्भुतरामायण [ पंचविंशति-

नाम्नामष्टसहस्रेण तुष्टाव परमेश्वरम् ।। ॐ सीतोमा परमा शक्तिरनंता निष्कलामला ।। १७ ।। शांता माहेश्वरी नित्या शाश्वती १० परमाक्षरा ।। अचिन्त्या केवलानंता शिवात्मा परमात्मिका ।। १८ ।। १००८ एक हजार आठ नामसे परमेश्वरीकी स्तुति करने लगे, ॐ सीता, उमा परमा, शक्ति, अनन्ता, निष्कला, अमला ।। १७ ।। शांता, माहेश्वरी, शाश्वती, १०, परमाक्षरा, अचिंत्या, केवला, अनंता, शिवात्मा, परमात्मिका १८।

अनादिरव्यया शुद्धा देवात्मा २० सर्वगोचरा ।। एकानेकविभा- गस्था मायातीता सुनिर्मला ।। १९ ।। महामाहेश्वरी शक्ता महादेवी निरंजना ।। काष्ठा ३० सर्वांतरस्था च चिच्छक्तिरति लालसा ।। २० ।। अनादि, अव्यया, शुद्धा देवात्मा २० सर्वगोचरा, एक अनेक विभागमें स्थित मायासे परे निर्मल ।। १९ ।। महामाहेश्वरी, शक्ता, महादेवी, निरंजना, काष्ठा ३० सर्वांतरस्था, चिच्छक्ति, अति लालसा ।। २० ।।

जानकी मिथिलानंदा राक्षसांताविधायिनी ।। रावणांतकरी रम्या रामवक्षःस्थलालया ।। २१ ।। उमा सर्वात्मिका ४० विद्या ज्योतीरू- पाऽयुताक्षरी ।। शांतिः प्रतिष्ठा सर्वेषां निवृत्तिरमृतप्रदा ।। २२ ।। जानकी, मिथिलाके जनोंको आनंदकी देनेवाली, राक्षसोंका अंत करनेवाली, रावणका अंत करनेवाली, मनोहर रामके वक्षस्थलमें विहार करनेवाली ।। २१ । उमा, सर्वात्मिका ४०, विद्या, ज्योतिरूपा, अयुताक्षरी, शांति, सबकी प्रतिष्ठा, निवृत्ति, अमृत देनेवाली ।। २२ ।।

व्योममूर्तिर्व्योममयी व्योमाधारा ५० ऽच्युतातलता ।। अनादि- निधना योषा कारणात्मा कलांकुला ।। २३ ।। नंदप्रथमजा नाभिर- मृतस्यांतसंश्रया ।। प्राणेश्वरप्रिया ६० मातामही महिषवाहना २४ व्योममूर्ति, व्योममयी, व्योमाधारा ५० अच्युता, लता, आदिअन्तरहिता, योषा, कारणात्मा, कुलाकुला ।। २३ ।। नन्दके यहां प्रथम उत्पन्न होनेवाली नाभिमें अमृतके आश्रयवाली, प्राणेश्वरप्रिया ६०, मातामही महिषवाहन- वाली ।। २४ ।।

प्राणेश्वरी प्राणरूपा प्रधानपुरुषेश्वरी ।। सर्वशक्तिः कला काष्ठा ज्योत्स्नेन्दो ७० र्महिमास्पदा ।। २५ ।। सर्वकार्यनियंत्री च सर्वभूते- श्वरीश्वरी ।। अनादिरव्यक्तगुणा महानन्दा सनातनी ।। २६ ।।