भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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(९०) अद्भुतरामायण [ सप्तदश-

रावण बडा दुराचारी था यह सत्य है और इसमें सन्देह नहीं है, वह अपने दशवदनोंसे जगत्का उद्वेजन करनेवाला था ।। १९ ।। परन्तु हे ब्राह्मणो ! रावणका वध कुछ विशेष प्रशंसाके योग्य नहीं है यह वचन सुनकर मुनि परम विस्मयको प्राप्त हुए ।। २० ।।

किमेतदिति होचुस्ते परस्परमुखेक्षणाः ।। अयोनिसां भवा सीता काकुत्स्थकुलमाश्रिता ।। २१ ।। अस्मानपिंजहासेयं किमेतन्नैव विद्महे ।। तच्छ्रु.त्वा वचनं तेषां मुनीनां भावितात्मनाम् ।। २२ ।।

और यह क्या है ऐसा कह परस्पर एक दूसरेका मुख देखने लगे, अयोनिसे उत्पन्न हुई सीता इक्ष्वाकुवंशके आश्रित हुई ।। २१ ।। हमारे वचनोंपर हास्य करती है इसका कारण हम नहीं जानते हैं तब उन ज्ञानात्मा मुनियोंके यह वचन सुनकर ।। २२ ।।

सीता भीता प्रणम्योचे कृतांज्जलिपुटा सती । पृथग्जनेव ❊ मुनयो नाहमनृतभाषिणी ।। २३ ।। यदि चाज्ञापयथ मां तदा वक्ष्यामि चादितः ।। अगस्त्यप्रमुखा विप्राः सीताया विनयान्वितम् ।। २४ ।।

जानकी डरती हुई प्रणाम कर कहने लगी हे मुनियो ! मैं पामर मनुष्योंके समान असत्यभाषिणी नहीं हूँ ।। २३ ।। जो आप मुझे आज्ञा दें तो मैं आदिसे कहती हूँ, तब अगस्त्यादि ऋषि जानकीके यह विनययुक्त वचन ।। २४ ।।

आकर्ण्य वचनं प्रीताः प्रोचुस्ते कथ्यतामिति ।। ततः सीता महाभागा प्रवक्तुमुपचक्रमे ।। २५ ।। पतिं मुनीन्देवरंश्च मंत्रिणः श्रेणिमुख्य-कान् ।। विनयेनाभ्यनुज्ञाप्य पूर्ववृत्तांतमादरात् ।। २६ ।।

सुनकर जानकीसे कहने लगे वर्णन करो तब महाभागा जानकी कहनेकी इच्छा करने लगी ।। २५ ।। पति मुनि देवर मन्त्री और और श्रेणीके मुख्य लोगोंसे आज्ञा ले पूर्ववृत्तान्त वर्णन करने लगी ।। २६ ।।

पूर्वं विवाहान्मुनयो यदास पितृमंदिरे ।। तदैकोऽतिथिरूपेण ब्राह्मणः समुपागतः ।। २७ ।। आगत्य पितरं मह्यं तमुवाच द्विजोत्तमः ।। चतुरो वार्षिकान्मासान्स्थास्यामि तव मंदिरे ।। २८ ।।

हे मुनियो ! विवाहसे पूर्व जब मैं अपने पिताके मंदिरमें रहती थी तब


* पामर इव संधिरार्षः ।