भारतकोश
अध्यात्म रामायण

अध्यात्म रामायण

Adhyatma Ramayana

महर्षि वेदव्यास (टीकाकार: मुनीलाल) द्वारा

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स्वामीजी श्रीभोलेबाबाजीव्दारा लिखित पुस्तकें

श्रुति-रत्नावली— (सचित्र) वेद-उपनिषद् आदिके चुने हुए मन्त्रोंका अर्थसहित संग्रह मूल्य ॥)

श्रुतिकी टेर— (सचित्र) पृष्ठ-संख्या १५०, पुस्तक सीधी-सादी बोलचालकी कवितामें लिखी गयी है, वेदान्तके विषयकी है। मूल्य केवल ।)

वेदान्त-छन्दावली— (सचित्र) इसमें वेदान्तके विचारणीय प्रश्न और उपदेश हैं, पुस्तक सुन्दर कवितामें लिखी गयी है। पृष्ठ-संख्या ७५ मू० =)।।

श्रीवियोगी हरिजीकी पुस्तकें—

प्रेम-योग— आपकी भावुकतापूर्ण लेखनीसे लिखा हुआ यह ग्रन्थ अपने ढंगका एक ही है। सजीव भाषा और दिव्य भावोंसे सना हुआ यह प्रेम-योग प्रेम-साहित्यका एक पूर्ण ग्रन्थ कहा जा सकता है। दो खण्ड, पृ० ४२०, मूल्य १।) सजिल्द १॥)

गीतामें भक्ति-योग— आपके अन्य ग्रन्थोंकी तरह यह पुस्तक भी सुन्दर हुई है। पृष्ठ १०८, दो चित्र, मू० ।-)

भजन-संग्रह पहला भाग— इस भागमें तुलसीदासजी, सूरदासजी, कबीरजीके भजन हैं। मू० =)

भजन-संग्रह दूसरा भाग— इसमें हितहरिवंश, स्वामी हरिदास, गदाधर भट्ट, व्यासजी, श्रीभट्ट, सूरदास, नागरीदास, नारायणस्वामी, ललितकिशोरी, दादू-दयाल, रैदास, मलूकदास, चरनदास, गुरु नानक आदिके भजन हैं। मू० ... =)

भजन-संग्रह तीसरा भाग— इसमें मीराबाई, सहजो-बाई, बनीठनी, प्रतापकुंवरि, श्रीयुगलप्रिया, श्री-रामप्रिया, रानी रूपकुँवरि आदिके भजन हैं। मू०=)

चतुर्वेदी पं० श्रीद्वारकाप्रसादजीकी पुस्तकें—

भागवतरत्न प्रह्लाद— यह पवित्र चरित्र हम माँ, बहिन, बेटी, भाई, भौजाई आदि सबके हाथोंमें पढ़नेके लिये दे सकते हैं। पृष्ठ ३४०, ३ रंगीन और ३ सादे चित्र, मू० १) सजिल्द ... १।)

देवर्षि नारद— जैसे भगवान्‌के चरित्रोंसे हमारे धर्म-शास्त्र भरे पड़े हैं, वैसे ही नारदजीकी पुण्यमयी गाथाएँ भी हमारे शास्त्रोंमें ओतप्रोत हैं। पृष्ठ २४०, २ रंगीन, ३ सादे चित्र मू० ।।।) स० १)


कुछ अन्य लेखकोंकी पुस्तकें—

श्रीअरविन्द घोष
माता— इस पुस्तकका इतना ही परिचय देना बहुत होगा कि यह श्रीअरविन्दकी विचारधारा या एक प्रिय श्रेष्ठ रचना है।
मूल्य ... ।)

श्रीमालवीयजी
ईश्वर— महामना मालवीयजीने इस पुस्तकमें ईश्वरके स्वरूपका और धर्मका वेदशास्त्र-सम्मत बहुत ही सुन्दर निरूपण किया है। मूल्य केवल ... -)।

श्रीगान्धीजी
सप्त-महाव्रत— इसमें सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य, अस्वाद और अभय इन सात महाव्रतोंपर महात्मा गान्धीजी द्वारा लिखित बड़ी ही सुन्दर अनुभवपूर्ण व्याख्या है। मूल्य केवल -)

श्रीशंकराचार्य श्रीभारती कृष्णतीर्थ
आचार्यके सदुपदेश— पृष्ठ-संख्या २२ मूल्य -)

श्रीनारायणस्वामी
एक सन्तका अनुभव— साधकों और सच्चे सुखके अभिलाषियोंके लिये बहुत ही कामकी चीज है, पुस्तक नित्य मनन करने योग्य है
मूल्य ... -)

पं० श्रीभवानीशङ्करजी महाराज
ज्ञानयोग— पृष्ठ १२०, मूल्य ... ।)

रायबहादुर लाला श्रीसीतारामजी
चित्रकूटकी झाँकी— इसमें पावन तीर्थ चित्रकूटका और उसके आस-पासके तीर्थोंका विशद वर्णन है। चित्रकूट-सम्बन्धी १२ चित्र हैं। मूल्य ... =)

श्रीज्वालासिंहजी
मनन-माला— सचित्र, गद्यके साथ-साथ अनेक पद्य भी हैं मूल्य ... =)॥

श्रीअरण्डेल
सेवाके मन्त्र— सच्ची सेवा क्या है ? और सच्चा सेवक कौन है, इस बातका यह छोटी-सी पुस्तिका पढ़नेसे पूरा पता लग जायगा, पृष्ठ-संख्या ३२, मूल्य ... )॥