भारतकोश
संग्रह पर लौटें

अध्यात्म रामायण

Adhyatma Ramayana

महर्षि वेदव्यास (टीकाकार: मुनीलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished423 पृष्ठ

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स्वामीजी श्रीभोलेबाबाजीव्दारा लिखित पुस्तकें

श्रुति-रत्नावली— (सचित्र) वेद-उपनिषद् आदिके चुने हुए मन्त्रोंका अर्थसहित संग्रह मूल्य ॥)

श्रुतिकी टेर— (सचित्र) पृष्ठ-संख्या १५०, पुस्तक सीधी-सादी बोलचालकी कवितामें लिखी गयी है, वेदान्तके विषयकी है। मूल्य केवल ।)

वेदान्त-छन्दावली— (सचित्र) इसमें वेदान्तके विचारणीय प्रश्न और उपदेश हैं, पुस्तक सुन्दर कवितामें लिखी गयी है। पृष्ठ-संख्या ७५ मू० =)।।

श्रीवियोगी हरिजीकी पुस्तकें—

प्रेम-योग— आपकी भावुकतापूर्ण लेखनीसे लिखा हुआ यह ग्रन्थ अपने ढंगका एक ही है। सजीव भाषा और दिव्य भावोंसे सना हुआ यह प्रेम-योग प्रेम-साहित्यका एक पूर्ण ग्रन्थ कहा जा सकता है। दो खण्ड, पृ० ४२०, मूल्य १।) सजिल्द १॥)

गीतामें भक्ति-योग— आपके अन्य ग्रन्थोंकी तरह यह पुस्तक भी सुन्दर हुई है। पृष्ठ १०८, दो चित्र, मू० ।-)

भजन-संग्रह पहला भाग— इस भागमें तुलसीदासजी, सूरदासजी, कबीरजीके भजन हैं। मू० =)

भजन-संग्रह दूसरा भाग— इसमें हितहरिवंश, स्वामी हरिदास, गदाधर भट्ट, व्यासजी, श्रीभट्ट, सूरदास, नागरीदास, नारायणस्वामी, ललितकिशोरी, दादू-दयाल, रैदास, मलूकदास, चरनदास, गुरु नानक आदिके भजन हैं। मू० ... =)

भजन-संग्रह तीसरा भाग— इसमें मीराबाई, सहजो-बाई, बनीठनी, प्रतापकुंवरि, श्रीयुगलप्रिया, श्री-रामप्रिया, रानी रूपकुँवरि आदिके भजन हैं। मू०=)

चतुर्वेदी पं० श्रीद्वारकाप्रसादजीकी पुस्तकें—

भागवतरत्न प्रह्लाद— यह पवित्र चरित्र हम माँ, बहिन, बेटी, भाई, भौजाई आदि सबके हाथोंमें पढ़नेके लिये दे सकते हैं। पृष्ठ ३४०, ३ रंगीन और ३ सादे चित्र, मू० १) सजिल्द ... १।)

देवर्षि नारद— जैसे भगवान्‌के चरित्रोंसे हमारे धर्म-शास्त्र भरे पड़े हैं, वैसे ही नारदजीकी पुण्यमयी गाथाएँ भी हमारे शास्त्रोंमें ओतप्रोत हैं। पृष्ठ २४०, २ रंगीन, ३ सादे चित्र मू० ।।।) स० १)


कुछ अन्य लेखकोंकी पुस्तकें—

श्रीअरविन्द घोष
माता— इस पुस्तकका इतना ही परिचय देना बहुत होगा कि यह श्रीअरविन्दकी विचारधारा या एक प्रिय श्रेष्ठ रचना है।
मूल्य ... ।)

श्रीमालवीयजी
ईश्वर— महामना मालवीयजीने इस पुस्तकमें ईश्वरके स्वरूपका और धर्मका वेदशास्त्र-सम्मत बहुत ही सुन्दर निरूपण किया है। मूल्य केवल ... -)।

श्रीगान्धीजी
सप्त-महाव्रत— इसमें सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य, अस्वाद और अभय इन सात महाव्रतोंपर महात्मा गान्धीजी द्वारा लिखित बड़ी ही सुन्दर अनुभवपूर्ण व्याख्या है। मूल्य केवल -)

श्रीशंकराचार्य श्रीभारती कृष्णतीर्थ
आचार्यके सदुपदेश— पृष्ठ-संख्या २२ मूल्य -)

श्रीनारायणस्वामी
एक सन्तका अनुभव— साधकों और सच्चे सुखके अभिलाषियोंके लिये बहुत ही कामकी चीज है, पुस्तक नित्य मनन करने योग्य है
मूल्य ... -)

पं० श्रीभवानीशङ्करजी महाराज
ज्ञानयोग— पृष्ठ १२०, मूल्य ... ।)

रायबहादुर लाला श्रीसीतारामजी
चित्रकूटकी झाँकी— इसमें पावन तीर्थ चित्रकूटका और उसके आस-पासके तीर्थोंका विशद वर्णन है। चित्रकूट-सम्बन्धी १२ चित्र हैं। मूल्य ... =)

श्रीज्वालासिंहजी
मनन-माला— सचित्र, गद्यके साथ-साथ अनेक पद्य भी हैं मूल्य ... =)॥

श्रीअरण्डेल
सेवाके मन्त्र— सच्ची सेवा क्या है ? और सच्चा सेवक कौन है, इस बातका यह छोटी-सी पुस्तिका पढ़नेसे पूरा पता लग जायगा, पृष्ठ-संख्या ३२, मूल्य ... )॥


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अन्य ग्रन्थ

श्रीश्रीचैतन्य-चरितावली (खण्ड १)—(सचित्र) श्रीचैतन्यकी इतनी बड़ी जीवनी अभीतक हिन्दीमें नहीं निकली। यह पाँच खण्डोंमें सम्पूर्ण होगी। बहुत ही सुन्दर ग्रन्थ है। मूल्य |||=) सजिल्द १=)

श्रीएकनाथ-चरित्र—(सचित्र) दक्षिणाके महान् भगवद्भक्तकी यह जीवनी अलौकिक है। भगवान् स्वयं आपके नौकर थे, पढ़ने योग्य है। मू० ||)

श्रीरामकृष्ण परमहंस—(सचित्र) आप कुछ ही दिन पहले अत्यन्त प्रसिद्ध भगवद्भक्त हो गये हैं। आपका नाम विलायत और अमेरिकातक प्रसिद्ध है। इस पुस्तकमें ३०० उपदेश भी संग्रहीत हैं मूल्य |=)

भक्त-भारती—(७ चित्र) सरल कवितामें सात भक्तोंकी सुन्दर रोचक कथाओंका वर्णन है, सबके लिये सुगम है। मूल्य ... |=)

श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध—सचित्र-सटीक, भागवतमें दशम और एकादश स्कन्ध सर्वोपरि हैं। लगभग ४२० पेजकी पुस्तकका दाम केवल |||) स० १)

विवेक-चूड़ामणि—(सचित्र) मूल श्लोक और हिन्दी-अनुवाद पृष्ठ २२४, मू० |=) स० ... ||=)

प्रबोध-सुधाकर—(सचित्र) विषय-भोगोंकी तुच्छता और आत्मसिद्धिके उपाय बताये गये हैं, =)||

अपरोक्षानुभूति—(सचित्र) मूल श्लोक और हिन्दी-अनुवाद-सहित, मू० ... =)||

**मनुस्मृति—**केवल दूसरा अध्याय और उसका हिन्दी-अनुवाद, मू० ... -)||

**विष्णुसहस्रनाम—**मूल्य ||| सजि० -)||

**हरेरामभजन—**मूल्य ... )III

**पातञ्जलयोगदर्शन—**मूल ... )।

**बलिवैश्वदेवविधि—**मूल्य ... )||

**प्रश्नोत्तरी—**इसमें भी मूल श्लोकोंसहित हिन्दी-अनुवाद है, मू० ... )||

**सन्ध्या—**हिन्दी-विधि-सहित, मू० ... )||


नयी पुस्तकें—

**अध्यात्मरामायण—**आपके हाथमें है। इसकी विशेषताएँ देखिये। संस्कृत श्लोकोंका अर्थ इस ढंगसे रक्खा गया है कि समझनेमें सुगमता हो। हो सके तो एक पुस्तक लेकर घर-परिवारके सब लोगोंको सुनाइये।

श्रीश्रीचैतन्य-चरितावली दूसरा खण्ड—(कई तिरंगे, दुरंगे, इकरंगे चित्रोंसहित ।) बहुत शीघ्र प्रकाशित होनेकी आशा है। श्रीचैतन्यदेवकी इतनी बड़ी ऐसी सुन्दर जीवनी हिन्दीमें अभीतक नहीं छपी। आपने पहला खण्ड देखा होगा, नहीं तो दोनोंके लिये साथ ही आर्डर देकर एक-एक प्रति मँगा लीजिये। दूसरे भागकी पृष्ठ-संख्या लगभग ४५० होगी। उपन्यास आदिके पढ़नेमे समय बचाकर महान् पुरुषोंकी जीवनियाँ पढ़नेमें बहुत लाभ प्रतीत होता है।

**रामगीता सटीक—**इसमें श्रीरामचन्द्रजीने लक्ष्मणजीको ज्ञानका विषय उत्तम रीतिसे समझाया है। छपाई सुन्दर है, मूल्य ... -)

**दिनचर्या—**इस पुस्तकका विषय नामसे ही प्रकट है। हिन्दू-संस्कृतिके अनुसार सबेरे आँख खुलनेसे रात्रिको सो जानेतक किस भाव और क्रियासे जीवन व्यतीत करना चाहिये, यह बताया है, साथ ही ब्रह्मचर्य, गृहस्थ आदि आश्रमोंके कुछ धर्म-नियम, स्वास्थ्यके नियम-साधन, ध्यान-प्राणायाम विषयकी बातें भी बतायी हैं। नित्य-पाठके उपयुक्त कई स्तोत्र मूल और सटीक और तुलसीदासजी, सूरदासजी आदि कई भक्तोंके भजन भी दिये गये हैं। पुस्तक शीघ्र प्रकाशित होनेकी आशा है।

तत्त्व-चिन्तामणि द्वितीय भाग—(सचित्र) ले० श्रीजयदयालजी गोयन्दका। इसका पहला भाग आपने देखा होगा। इसमें मनुष्य-कर्तव्य, भगवान्‌की प्राप्तिके विविध उपाय, सन्ध्या, बलिवैश्वदेव और यज्ञोंको प्रणाम करनेकी आवश्यकता इत्यादि परमार्थ-सम्बन्धी बहुत-से लेखोंका संग्रह है।

**श्रीविष्णुपुराण भाषाटीकासहित—**यह अठारह पुराणोंमेंसे एक है। यह प्रसिद्ध और अत्यन्त उपयोगी धर्मग्रन्थ है। इसके विषयमें अधिक क्या लिखें। इसकी छपाई अध्यात्मरामायणके ढंगसे ही हो रही है।

**विष्णुसहस्रनाम—**भगवान् विष्णुके सहस्र नामोंका श्रीशंकराचार्यजीने विस्तृत व्याख्या की है। उसीका यह भाष्यसहित सरल हिन्दी-अनुवाद प्रकाशित किया जायगा। भक्तोंके लिये यह बहुत ही उत्तम और सुन्दर, सचित्र ग्रन्थ होगा।

**ब्रजपरिचय (सचित्र)—**लेखक गोस्वामी लक्ष्मणायचार्यजी। इसमें ब्रजके मुख्य-मुख्य स्थानोंके विवरण सुन्दर ढंगसे रहेंगे, ब्रज-प्रेमियोंके लिये बड़े कामकी चीज़ होगी।

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चित्र

छोटे, बड़े, रंगीन और सादे धार्मिक चित्र

श्रीकृष्ण, श्रीराम, श्रीविष्णु और श्रीशिवके दिव्यदर्शन ।

जिसको देखकर हमें भगवान् याद आवें, वह वस्तु हमारे लिये संग्रहणीय है । किसी भी उपायसे हमें भगवान् सदा स्मरण होते रहें तो हमारा धन्य भाग हो । भक्तों और भगवान्‌के स्वरूप एवं उनकी मधुर मोहिनी लीलाओंके सुन्दर दृश्य-चित्र हमारे सामने रहें तो उन्हें देखकर थोड़ी देरके लिये हमारा मन भगवत्-स्मरणमें लग जाता है और हम सांसारिक पाप-तापोंको भूल जाते हैं ।

ये सुन्दर चित्र किसी अंशमें इस उद्देश्यको पूर्ण कर सकते हैं । इनका संग्रहकर प्रेमसे जहाँ आपकी दृष्टि नित्य पड़ती हो, वहाँ घरमें, बैठकमें और मन्दिरोंमें लगाइये एवं चित्रोंके बहाने भगवान्‌को यादकर अपने मन-प्राणको प्रफुल्लित कीजिये । भगवान्‌की मोहिनी मूर्तिको ध्यान कीजिये ।

कागजका साइज १० इञ्च चौड़ा १५ इञ्च लम्बा, सुनहरी चित्रका -)॥, रंगीन चित्रका मूल्य -), दो रंगके और सादे चित्रका मूल्य )॥, यह छोटे ब्लाकोंसे ही वेल (बार्डर) लगाकर बड़े कागजोंपर छापे गये हैं

कागजोंका साइज ७॥ $\times$ १० इञ्च, सुनहरीका मूल्य -) ।, रंगीनका मूल्य )॥, सादेका )॥ मात्र ।

इनके सिवा १८$\times$२३, १५$\times$२० और २४$\times$॥ के बड़े और छोटे चित्र भी मिलते हैं ।

दुकानदार और थोक खरीदारोंको कमीशन भी दी जाती है ।

चित्रोंकी बड़ी सूची अलग मुफ्त मँगवाइये !

पता—
गीताप्रेस, गोरखपुर


"कल्याण" धार्मिक मासि[क]

( हर महीनेमें २०५०० छपता)

भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और धर्मसम्बन्धी मासिक पत्र, पृष्ठ-संख्या ८०, मूल्य ४=), [जिस]में एक विशेषांक भी निकलता है जो आठ [आनेके] मूल्यमें मिल जाता है । अबतक ६ विशेषांक [निकल] चुके हैं ।

( डाकमहसूलसहित )

भगवन्नामांक
पृष्ठ-संख्या ११०, चित्र-संख्या ४१, मू[ल्य ...]

रामायणांक
पृष्ठ-संख्या ५००, चित्र-संख्या १६०, मू० [५]

श्रीकृष्णांक
पृष्ठ-संख्या ५२२, चित्र-संख्या १०८, मू० २ [?]

ईश्वरांक सपरिशिष्टांक
पृष्ठ-संख्या ६२४, चित्र-संख्या ३३, मू० [?]

तीसरे वर्षकी फाइल—( प्रसिद्ध श्रीभक्तांक सहित ) अनेक सुन्दर चित्र और उपादेय लेख एवं कविताओंका यह संग्रह आपकी पुस्तकोंमें स्थान पाने योग्य है । सत्संग और पठन-पाठनकी अच्छी सामग्री है । धार्मिक विचारोंका सुन्दर संग्रह और स्थायी साहित्य है । भक्तोंकी कथाएँ विशेष मनोहर हैं । पूरी १२ अंकोंकी फाइलका मूल्य केवल ४=) मात्र, डाकखर्च माफ । (भक्तांक अलग नहीं मिलता)

चौथे वर्षकी फाइल—( सुविख्यात श्रीगीतांकसहित ) लगभग २०० चित्र और १४०० पृष्ठ । मूल्य केवल ४=), डाकव्यय माफ । ( गीतांक अलग नहीं मिलता )

जब श्रीगीतांक निकला तब कल्याणकी ग्राहकसंख्या ७५०० से लगभग १३००० हो गयी थी । यह गीताके सम्बन्धमें अपने ढंगका अनोखा ग्रन्थ है । बहुत थोड़ा बचा है । पहले-दूसरे या पाँचवें-छठे वर्षकी तरह ये फाइलें भी समाप्त हो जानेपर मिलनी कठिन हैं । भेंट आदिमें देनेके लिये भी यह उत्तम सामग्री है ।

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श्रीरामायणांक

बहुत । दूसरा संस्करण ! पुनः छप गया ! नवीन संस्करण !

की प्राप्तिके लिये अनेक प्रेमी लालायित थे वही 'रामायणांक' पुनः छप गया। केवल ५००० छपा महान् (=) ही रक्खा गया है। जिन सज्जनोंकी माँग लौटा दी गयी थी, वे अब मँगवा सकते हैं। पृष्ट भगवान् ऊपर और सैकड़ों चित्र हैं।

, मायणांकका गेटप, छपाई, सफाई, कागज और बाइंडिंग सब सुन्दर हैं।

ही दि रामायणांकमें श्रीरामजीकी लीलाओंके अनेक सुनहरी, बहुरंगे, सादे चित्र एवं अनेक पवित्र तीर्थ आपव प्रयाग, काशी, चित्रकूट, पञ्चवटी, रामेश्वर, जनकपुर, शृङ्गवेरपुर आदिके दर्शनीय चित्र हैं; रामायण-इस भारतके कई भौगोलिक मानचित्र भी हैं।

रामायणांकमें अनेक महात्माओं, देशी-विदेशी विद्वानों और रामायणप्रेमियोंके लेख हैं।

सात रामायणांक सुखमय जीवनका अमोघ साधन है।

के हि आजतक कल्याणके सिवा इतने बड़े किसी भी सामयिक पत्रको दुबारा छपकर आपकी सेवा करनेका र नहीं मिला। यदि आप इस बार इस अङ्कको न अपना सकेंगे तो समझ लीजिये कि एक उत्कृष्ट वस्तुमे वञ्चित रह जायँगे, क्योंकि इसके शीघ्र तीसरी बार छपनेकी आशा हम अभी आपको नहीं दिला सकते। खरीदनेमें शीघ्रता कर सकते हैं।

व्यवस्थापक—
"कल्याण-कार्यालय," गोरखपुर