भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

पृष्ठ 117, कुल 337 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 117

(56) अगस्त्य-संहिता

वसिष्ठ, वामदेव, जाबालि, गौतम, भरद्वाज, कौशिक, वाल्मीकि और नारद ये आठ पार्षद ऋषि हैं। नलं नीलं च गवयं गवाक्षं गन्धमादनम् ।।33।। सुरभिश्चापि मैन्दं च द्विविदं च जपेत् क्रमात् ।¹ नल, नील, गवय, गवाक्ष, गन्धमादन, सुरभि, मैन्द और द्विविद का भी क्रमशः जप करना चाहिए। शङ्खचक्रगदापद्मशार्ङ्गबाणात्मने नमः ।।34।। गरुत्मते नमस्तुभ्यं विष्वक्सेनादिकाश्च ये। शंख, चक्र, गदा, पद्म, शार्ङ्ग और बाण इन शस्त्रास्त्रों को प्रणाम। हे गरुड़ आपको प्रणाम, शार्ङ्ग धारण करने वाले विष्वक्सेन आदि को प्रणाम। सर्वैश्वर्यस्वरूपाय ज्योतिषे सततं नमः ।।35।। मनोवाक्कायसहितं कर्म यद् वा शुभाशुभम् ।। तत्सर्वं प्रीतये भूयान्नमो रामाय शार्ङ्गिणे ।।36।। सभी प्रकार के ऐश्वर्य के स्वरूप तथा प्रकाशस्वरूप श्रीराम को प्रणाम। मेरे मन, वचन तथा शरीर से जो भी शुभ अथवा अशुभ कर्म किये गये हैं उन सबसे श्रीराम प्रसन्न हों। शार्ङ्ग धनुषधारी श्रीराम को प्रणाम। एतद् रहस्यं सततं प्रत्यूषसि समाहितः। यः पठेद् राममाहात्म्यं सर्वैश्वर्यनिधिर्भवेत् ।²।37।। विनाशयेदसौभाग्यं दारिद्र्यौघं निकृन्तयेत्। उपद्रवांश्च शमयेत् सर्वलोकं वशं नयेत् ।।38।। यः पठेत् प्रातरुत्थाय ब्रह्मार्पणधियान्वहम्। स याति शाश्वतं ब्रह्म पुनरावृत्तिदुर्ल्लभम् ।।39।। जो प्रतिदिन प्रातःकाल इस रहस्यमय राम माहात्म्य का पाठ करते हैं, वे सभी ऐश्वर्यों के भण्डार बन जाते हैं। यह माहात्म्य दुर्भाग्य का विनाश करता है; दरिद्रताओं को काटता है, उपद्रवों को शान्त करता है, सबको वश में ला देता है। जो प्रातःकाल उठकर ब्रह्म को समर्पित करने की बुद्धि से प्रतिदिन स्तोत्र का पाठ करते हैं। वे उस अविनाशी ब्रह्म को पा लेते हैं, जहाँ से पुनर्जन्म नहीं होता।

  1. घ. ये चार चरण में अनुपलब्ध। 2. घ. विश्वैश्वर्य० Rarest Archiver