भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 133

(72) अगस्त्य-संहिता सत्यायै शङ्खिने चैव चण्डायै च नमो नमः ।।२२।। हलिने वाण्यै दद्याच्च तथा मुषलिने वदेत्। विलासिन्यै शूलिने विजयायै तदनन्तरम् ।।२३।। पाशिने विरजायै च तथा चाङ्कुशिने वदेत्। विश्वायै च मुकुन्दाय विनदायै नमस्ततः ।।२४।। नन्दजाय सुनन्दायै नन्दिने स्मृतये नमः। नराय ऋद्ध्यै च तथा तद्वन्नरकजिते तथा ।।२५।। समृद्ध्यै हरये शुद्ध्यै कृष्णाय बुद्धये तथा। सत्याय भुक्त्यै सात्वताय मत्यै नम इतीरयेत् ।।२६।। शौराय च क्षमायै च शूराय रमायै नमः। जनार्दनाय चोमायै ततः स्याद् भूधराय च ।।२७।। क्लेदिन्यै च विश्वमूर्त्यै क्लिन्नायै तदनन्तरम्। वैकुण्ठाय नमस्तद्वद् वसुदायै नमस्ततः। पुरुषोत्तमाय वसुधायै बलिने परायै ततः ।।२८।। बलानुजाय परायणायै नम इतीरयेत्। महाबलाय सूक्ष्मायै नमः स्यात्तदनन्तरम्। वृषघ्नाय सन्ध्यायै वृषाय प्रज्ञायै नमः ।।२९।। हंसाय च प्रभायै वराहाय निशायै तथा। विमलाय अमोघायै नृसिंहाय तदन्तरम्। विद्युतायै नमस्तद्वद् वैष्णवी मातृकां न्यसेत् ।।३०।। क्रमेण कामबीजञ्च मातृकाक्षरमेव च।] ¹ॐकारं कामबीजं च मातृकाक्षरमेव च ।।३३।। ²एकं देवं तथा शक्तिमेकां नम इति क्रमः। ॐकार, कामबीज, मातृकाक्षर इसके बाद एक देव एक शक्ति तथा इसके बाद नमः बोलें यहीं क्रम है। केशवादिरयं न्यासो न्यासमात्रेण देहिनाम् ।।३४।। अच्युतत्वं ददात्येव सत्यं सत्यं न संशयः। यह केशवादि न्यास कहलाता है। केवल इस न्यास से प्राणियों को अच्युतत्व मिल जाता है, यह सत्य है, इसमें सन्देह नहीं। 1.-2. घ. में अनुपलब्ध।