भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

पृष्ठ 132, कुल 337 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 132

द्वादशोऽध्यायः (71) 16 ॐ क्लीं तं हरये शुद्धौ केशवाय कीर्त्यै नमः। 17 ॐ क्लीं थं कृष्णाय तुष्ट्यै केशवाय कीर्त्यै नमः। 18 ॐ क्लीं दं सत्याय मत्यै केशवाय कीर्त्यै नमः। 19 ॐ क्लीं धं सात्विताय सत्यै केशवाय कीर्त्यै नमः। 20 ॐ क्लीं नं शौरये क्षमायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 21 ॐ क्लीं पं शूराय परमायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 22 ॐ क्लीं फं जनार्दनाय उमायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 23 ॐ क्लीं बं भूधराय क्लेदिन्यै केशवाय कीर्त्यै नमः। 24 ॐ क्लीं भं विश्वमूर्तये क्लिन्नायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 25 ॐ क्लीं मं वैकुण्ठाय वसुदायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 26 ॐ क्लीं यं पुरुषोत्तमाय वसुधायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 27 ॐ क्लीं रं बलिने अपराजितायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 28 ॐ क्लीं लं बलानुजाय परायणायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 29 ॐ क्लीं वं वृषध्वाय च सूक्ष्मायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 30 ॐ क्लीं शं वृषाय सन्ध्यायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 31 ॐ क्लीं षं हंसाय च केशवाय कीर्त्यै प्रज्ञायै नमः। 32 ॐ क्लीं सं वराहाय प्रभायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 33 ॐ क्लीं हं विमलाय निशायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 34 ॐ क्लीं क्षं नृसिंहाय अमोघायै केशवाय कीर्त्यै नमः। इस प्रकार वैष्णव मन्त्रों से मातृकान्यास करें। क्रम से कामबीज (क्लीं) एवं मातृका के अक्षर बोलकर केशवाय कीर्त्यै नमः यह जोड़कर न्यास करें। शिर, मुखवृत्त आदि स्थानों में यह विधि कही गयी है। (केशवादिन्यास के स्थल पर मूल 'क' पाण्डुलिपि का वाचन कष्टसाध्य होने के कारण पाठोद्धार के लिए म. म. गोविन्द ठाकुर (14वीं शती) कृत पूजा-प्रदीप के केशवादिन्यास का सहयोग लिया गया है, जो परम्परा की दृष्टि से प्रामाणिक है तथा पाण्डुलिपि 'क' के अनुरूप है। ये सम्पादित अंश कोष्ठ के अन्तर्गत हैं। बंगाल से प्रकाशित प्रति घ. में यह केशवादिन्यास बहुधा भिन्न है, अतः इसे पृथक् उद्धृत किया जा रहा है— [चक्रिणे दयायै च गदिने शार्ङ्गिणे तथा।।21।। दुर्गायै च प्रभायै च खङ्गिने विन्यसेदथ।