भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 131

(70) अगस्त्य-संहिता सत्याय मत्यै सात्विताय सत्यै नमो वदेत्।।26।। शौरये च क्षमायै च शूराय परमायै नमः। जनार्दनाय चोमायै ततः स्याद् भूधराय च।।27।। क्लेदिन्यै च विश्वमूर्त्यै क्लिन्नायै तदनन्तरम्। वैकुण्ठाय नमस्तद्वद् वसुदायै नमस्ततः।।28।। पुरुषोत्तमाय वसुधायै बलिनेऽपराजितायै। तथा बलानुजाय परायणायै नम इतीरयेत्।।29।। वृषभाय च सूक्ष्मायै वृषाय सन्ध्यायै नमः। हंसाय च प्रज्ञायै वराहाय प्रभायै तथा।।30।। विमलाय निशायै च नृसिंहाय तदन्तरम्। अमोघायै नमस्तद्वद् वैष्णवीं मातृकां न्यसेत्।।31।। क्रमेण कामबीजं च मातृकाक्षरमेव च। 1केशवं चापि कीर्तिं च नमोऽन्तं विन्यसेत् पुनः।।32।। 2शिरोवदनवृत्तादिस्थानेष्वेवं विधिः स्मृतः। 1 ॐ क्लीं कं चक्रिणे विजयायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 2 ॐ क्लीं खं गदिने दुर्गायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 3 ॐ क्लीं गं शार्ङ्गिणे प्रभायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 4 ॐ क्लीं घं खङ्गिने सत्यायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 5 ॐ क्लीं ङं शङ्खिने चण्डायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 6 ॐ क्लीं चं हलिने वाण्यै केशवाय कीर्त्यै नमः। 7 ॐ क्लीं छं मुसलिने विलासिन्यै केशवाय कीर्त्यै नमः। 8 ॐ क्लीं जं शूलिने जयायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 9 ॐ क्लीं झं पाशिने विरजायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 10 ॐ क्लीं ञं अङ्कुशिने विश्वायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 11 ॐ क्लीं टं मुकुन्दाय विमदायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 12 ॐ क्लीं ठं नन्दजाय सुनन्दायै केशवाय कीर्त्यै नमः। 13 ॐ क्लीं डं नन्दिने स्मृतये केशवाय कीर्त्यै नमः। 14 ॐ क्लीं ढं नराय ऋद्धयै केशवाय कीर्त्यै नमः। 15 ॐ क्लीं णं नरकजिते समृद्धयै केशवाय कीर्त्यै नमः। 1.-2. घ. में अनुपलब्ध।