पृष्ठ 16(14) अगस्त्य-संहिता
पाठ करते हैं, जैसे वेदपाठ का अनुसरण कर रहे हों। हमलोग ब्राह्मण हैं' यह
अपने बारे में उपदेश करते हैं और दूसरे से भी कराते हैं। शैव आदि आगमवाले
तो खैर चातुर्वर्ण्य के भीतर आते ही नहीं, वेद और स्मृतियों में वर्णित आश्रम का
त्याग कर अपने बनाये हुए दूसरे ही नियमों का पालन करते हैं। किन्तु ये
(पांचरात्रवाले) कहते हैं कि मैं जन्म से ब्राह्मण हूँ तथा मेरी सन्तति भी ब्राह्मण
रहेंगे। इस प्रकार कहते हुए उसी रूप में बोलते हुए चारों आश्रमों का अनुकरण
करते हैं।"
एक ऋत्विक् का आक्रोशपूर्ण कथन होने के कारण इसकी शैली व्यंग्यात्मक
है, किन्तु इससे पांचरात्र आगम में ब्राह्मणेतर साधकों का प्रवेश तथा समाज में
उनका सम्मान स्पष्ट प्रतीत है। इसीलिए वे कट्टर वैदिकों के लिए कर्णशल्य बने हुए हैं।
जयन्त भट्ट का यह कथन इसलिए भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है
क्योंकि इसमें पांचरात्र आगम के अनेक ग्रन्थों का भी संकेत किया गया है, जिनका
पाठ वे अनुयायी किया करते थे।
बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना से प्रकाशित 'पांचरात्रागम' ग्रन्थ में डा.
राघवप्रसाद चौधरी ने 'नारायण-संहिता' का हवाला देते हुए पांचरात्र की तीन
प्रकार की संहिताओं की सूची दी है। इस सूची में 21 सात्विक संहिताएँ, 33
राजम संहिताएँ तथा 33 तामस संहिताएँ सम्मिलित हैं। इनके अतिरिक्त अन्य
संहिताओं का भी संकेत है।
आधुनिक विद्वानों में डा. एच डेनियल स्मिथ ने 'वैष्णव आइकोनोग्राफी'
नामक पुस्तक में कुल 35 संहिता-ग्रन्थों की सूची दी है, जिनका संकलन उन्होंने
किया था। ये संहिताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) अगस्त्य-संहिता (2) अनिरुद्ध-संहिता (3) अहिर्बुध्न्य-संहिता
(4) ईश्वर-संहिता (5) कपिंजल-संहिता (6) काश्यप-संहिता
(7) गरुड़-संहिता (8) जयाख्य-संहिता (9) नारदीय-संहिता
(10) परम-संहिता (11) पराशर-संहिता (12) पाद्म-संहिता
(13) पारमेश्वर-संहिता (14) पुरुषोत्तम-संहिता (15) पौष्कर-संहिता
(16) बृहद् ब्रह्म-संहिता (17) भार्गव-तन्त्र (18) मार्कण्डेय-संहिता
(19) मार्कण्डेय-संहिता 2 (20) लक्ष्मी-संहिता (21) वायु-संहिता
(22) वाशिष्ठ-संहिता (23) विश्वामित्र-संहिता (24) विष्णुत्तत्त्व-संहिता
(25) विष्णुतान्त्र-संहिता (26) विष्णुतिलक-संहिता (27) विष्णु-संहिता
(28) विष्वक्सेन-संहिता (29) विहगेन्द्र-संहिता (30) शाण्डिल्य-संहिता
(31) शेष-संहिता (32) श्रीप्रश्न-संहिता (33) सनत्कुमार-संहिता
(34) सात्वत-संहिता 2 (35) हयशीर्ष-संहिता