अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
पृष्ठ 18, कुल 337 में से
संदर्भ में पढ़ें(16) अगस्त्य-संहिता ────────────────────────────────────────── रामोपासना की परम्परा में 'अध्यात्म-रामायण' का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसमें भी 'अगस्त्य संहिता' का उल्लेख हुआ है। इसके किष्किन्धाकाण्ड के चतुर्थ अध्याय में श्रीराम के मुख से लक्ष्मण को क्रियायोग अर्थात् रामोपासना का कर्मकाण्ड सुनाने की कथा है। इस सम्पूर्ण अध्याय में संक्षेप में पूजा-विधान का वर्णन किया गया है। इस पूजा-विधान पर 'अगस्त्य-संहिता की पद्धति' का पूर्ण प्रभाव है। इसके अतिरिक्त होमविधि के क्रम में कुण्डनिर्माण की विधि का उल्लेख न कर अगस्त्य-प्रोक्त मार्ग का उल्लेख कर दिया गया है। यहाँ कहा गया है कि आगमशास्त्र के ज्ञाता अगस्त्य मुनि द्वारा प्रतिपादित पद्धति से कुण्ड का निर्माण कर मूल मन्त्र से या पुरुषसूक्त से हवन करें— अगस्त्येनोक्तमार्गेण कुण्डेनागमवित्तमः। जुहुयान्मूलमन्त्रेण पुंसूक्तेनाथवा बुधः।।31।। अगस्त्य संहिता में 18वें अध्याय में कुण्ड निर्माण विधि विस्तार से उल्लिखित है। 'काव्यप्रकाश' के चर्चित प्रदीप-टीकाकार म.म. गोविन्द ठाकुर के पंचम पुत्र महामहोपाध्याय तर्कपञ्चानन आगमाचार्य देवनाथ ठक्कुर ने 1564 ई0 में अपनी 75 वर्ष की अवस्था में 'मन्त्रकौमुदी' नामक आगम के सिद्धान्त ग्रन्थ की रचना की। इसमें कुल 37 प्रकरण हैं, जिनमें आगम-कर्मकाण्ड के विविध विषयों का सविस्तर उल्लेख है। इस ग्रन्थ में पाँच स्थलों पर 'अगस्त्य-संहिता' का उल्लेख किया गया है- (1) इसके 'मण्डलविचार' नामक सप्तम प्रकरण के अन्त में पुरश्चरण के लक्षण पर विचार करते हुए पञ्चाङ्ग उपासना को पुरश्चरण मानकर प्रमाण के रूप में 'अगस्त्य-संहिता' का उल्लेख किया है- एतत् कण्ठरवेणैव प्राह चागस्त्यसंहिता। पञ्चाङ्गोपासनं भक्त्या पुरश्चरणमुच्यते।। अर्थात् अगस्त्य संहिता भी मुक्तकण्ठ से कहती है कि भक्तिपूर्वक पंचाङ्ग उपासना को पुरश्चरण कहते हैं। 'अगस्त्य-संहिता' 16।51 में भी इन्हीं शब्दों में पुरश्चरण को परिभाषित किया गया है। (2) 22वें प्रकरण में अर्ध्यादिस्थापन की विधि का उल्लेख करते हुए आवरण-पूजा का विस्तृत विवेचन न कर अगस्त्य-संहिता में उल्लिखित आवरण- पूजा को अपनाने का निर्देश किया है- Rarest Archiver