भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 337 में से

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पृष्ठ 24

(22) अगस्त्य-संहिता यहाँ स्पष्ट है कि 'रामतापानीयोपनिषद्' में किसी पूर्ववर्ती ग्रन्थ से उद्धृत ये श्लोक हैं। जब तक हमें 'रामतापानीयोपनिषद्' का रचनाकाल स्पष्ट नहीं हो जाता, तबतक हमें कम से कम इतना मानने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि 'अगस्त्य-संहिता' से ये श्लोक 'रामतापानीयोपनिषद्' में उद्धृत किये गये हैं और 'अगस्त्य-संहिता' 'रामतापानीयोपनिषद्' से पूर्व की रचना है। हेन्स बेकर ने 'अयोध्या' पुस्तक में 'रामतापानीयोपनिषद्' का रचनाकाल नवम शताब्दी माने जाने का उल्लेख किया है, किन्तु उन्होंने इस पर अपनी कोई टिप्पणी नहीं की है। अगस्त्य-संहिता' ग्रन्थ की उपलब्धता हेन्स बेकर ने 'अयोध्या' पुस्तक में 'अगस्त्य-संहिता'का पर्याप्त उल्लेख किया है तथा इसमें वर्णित रामोपासना की विधि का भी संगत उद्धरण के साथ उल्लेख किया है। हेन्स बेकर ने इसी ग्रन्थ मे लिखा है कि उनका यह सम्पूर्ण उल्लेख 'अगस्त्य-सुतीक्ष्ण संवाद' पुस्तक से लिया गया है, जिसका प्रकाशन रामनारायण दास के सम्पादन में लखनऊ से 1898 ई. में हुआ था। हेन्स बेकर ने 'अगस्त्य-संहिता' की 10 अन्य पाण्डुलिपियों का भी उल्लेख होने की सूचना दी है, किन्तु उन पाण्डुलिपियों की विषयवस्तु के प्रसंग में वे मौन हैं। प्रयास करने के बाद भी इसकी एक भी प्रति हमें उपलब्ध नहीं हो सकी। 'अगस्त्य-संहिता' का एक संस्करण कलकत्ता के हितवादी पुस्तकालय से 1916 साल (1909 ई.) में श्रीकमलकृष्ण स्मृतितीर्थ के सम्पादन में बंगला लिपि में बंगला अनुवाद के साथ हुआ। इसके प्रकाशक श्रीमनोंरंजन वन्द्योपाध्याय हैं तथा यह कलकत्ता के '10 नं. कलूटोला स्ट्रीट, हितवादी प्रेस, श्रीविनोदबिहारी चक्रवर्ती द्वारा मुद्रित एवं प्रकाशित हुआ था। इसके सम्पादक महोदय ने सूचना दी है कि उन्हें एक पाण्डुलिपि एशियाटिक सोसायटी से, दूसरी पाण्डुलिपि संस्कृत कालेज कलकत्ता से मिली थी तथा दो अन्य पाण्डुलिपियाँ उन्हें अपने गाँव से मिली थी। इन चार पाण्डुलिपियों के आधार पर 'अगस्त्य-संहिता' का यह महत्त्वपूर्ण सम्पादन है। वर्तमान प्रकाशन में इस पुस्तक का उपयोग हमने आधार-ग्रन्थ 'घ.' के रूप में किया है। विक्रम संवत् 2042 अर्थात् 1985 ई. में हरिद्वार से प. महावीर प्रसाद मिश्र के सम्पादन में 'अगस्त्य-संहिता' के 11 अध्यायों का प्रकाशन हिन्दी अनुवाद