भारतकोश
अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary

महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा

DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ

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पृष्ठ 269

(208) _ _ _ _ _ अगस्त्य-संहिता _ _ _ _ _ _ मातुरङ्कगतं राममिन्द्रनीलसमप्रभम्। कोमलाङ्गं विशालाक्षं विद्युद्वर्णसमावृतम् ।।27।। भानुकोटिप्रतीकाशं किरीटेन विराजितम्। रत्नग्रैवेयकेयूररत्नकुण्डलमण्डितम् ।।28।। रत्नकङ्कणमञ्जीरकटिसूत्रैरलंकृतम् । श्रीवत्सकौस्तुभोरस्कं मुक्ताहारोपशोभितम् ।।29।। सौवर्णे राजते पात्रे षट्कोणञ्च समं लिखेत्। अलाभे बिल्वपीठे वा स्थापयेद्रघुनन्दनम् ।।30।। माता कौशल्या की गोद में स्थित, नीलम के समान कान्ति वाले, कोमल अंगों वाले, विशाल आँखों वाले, बिजली के समान आभा से घिरे हुए, करोड़ों सूर्य के समान, मुकुटधारी, रत्नमय हार, बाजूबंद तथा रत्नमय कुण्डल से सुशोभित, रत्नमय कंगन, मंजीर, करधनी से अलंकृत श्रीवत्स और कौस्तुभमणि हृदय पर धारण किए हुए, मोती की मालाओं से सजे श्रीराम की स्थापना सुवर्ण अथवा चाँदी के पात्र में षट्कोण लिखकर करें। उपलब्ध न रहने पर बेल की लकड़ी से बनी चौकी पर स्थापना करें। वस्त्रद्वयसमायुक्तं दिव्यरत्नविभूषितम्। अस्त्रशक्तिसमायुक्तं देवेशं पूजयेत् क्रमात् ।।31।। एक जोड़ा वस्त्र से युक्त, दिव्य रत्नों से आभूषित, अस्त्र की शक्ति से युक्त देवेश श्रीराम की पूजा क्रम से करें। प्रणवं पूर्वमुच्चार्य नमः शब्दं ततो वदेत्। भगवत्पदमासाद्य वासुदेवाय इत्यपि ।।32।। ¹ततः सर्वात्मसंयोगयोगपीठात्मने नमः। इति मन्त्रेण तन्मध्ये कुर्यात् पुष्पाञ्जलिं पुनः ।।33।। सबसे पहले ‘ॐ’ ऐसा बोलकर तब ‘नमः’ पद बोलें। इसके बाद ‘भगवत्’ पद (भगवते) कहकर ‘वासुदेवाय’ यह भी कहें। तब ‘सर्वात्मसंयोगयोगपीठात्मने नमः’ इस मन्त्र से बीच में पुष्पाञ्जलि करें।

  1. यहाँ से चार चरण क. में अनुपलब्ध।