अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)

अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
DevanagariSanskritpublished337 पृष्ठ
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द्वात्रिंशोऽध्यायः (241)
इस प्रकार विशेष रूप से लिखकर यन्त्रशक्ति के रूप में 'एतां रामबलोपेतां' आदि छह श्लोक लिखकर प्रतिष्ठित करें। यन्त्र के बाहर वृत्त बनावें। सर्वदुष्टोपशमनं सर्वोपद्रवनाशनम् ।।77।। आयुरारोग्यमैश्वर्यंपुत्रपौत्रप्रवर्द्धनम् । सर्वान् कामानवाप्नोति विष्णुलोकं¹ च गच्छति।।78।। यह यन्त्र सभी दुष्टों को शान्त करता है, सभी उपद्रवों का नाश करता है, आयु आरोग्य, ऐश्वर्य, पुत्र, पौत्र आदि की वृद्धि करता है। इसे धारण करनेवाले सभी कामनाओं को प्राप्त करते हैं और विष्णुलोक भी जाते हैं। इत्यगस्त्यसंहितायां परमरहस्ये श्रीरामकवचोद्धारकथनं नाम द्वात्रिंशोऽध्यायः।² समाप्तश्चायं ग्रन्थः
- क. विष्णुलोके। 2. क. हनुमन्मन्त्रयंत्रश्रीरामकवचोद्धारकथनं नाम द्वात्रिंशोऽध्यायः।