अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
पृष्ठ 301, कुल 337 में से
संदर्भ में पढ़ें(240) अगस्त्य-संहिता छठे कोष्ठ में साध्य का नाम लिखकर ग्यारहवें कोष्ठ में स्वाहा लिखें। तब स्वबीज (रं) , इसके बाद कामबीज (क्लीं), शक्ति( ह्रीं), वाग्बीज( ऐं), वर्म(हुं) तथा नरसिंह बीज (ह्रौं), लक्ष्मीबीज (श्रीं), पाश (आं), अंकुश (क्रौं) और वाराहबीज (फट्) लिखकर स्वाहा लिखे। यह श्रीराम का द्वादशाक्षर मन्त्र कहा गया है- रं क्लीं ह्रीं ऐं हुं ह्रौं श्रीं आं क्रौं फट् स्वाहा। सौवर्णे राजते पात्रे भूर्जे वा सम्यगालिखेत्। अथवा ताम्रपत्रे च गुलिकीकृत्य धारयेत्।।74।। सोना, चाँदी, भोजपत्र या ताँबा के पत्र भलीभाँति लिखें और गोली बना कर धारण करें। यावज्जीवं तु सौवर्णे रौप्ये विंशतिवर्षकम्। भूर्जे द्वादशवर्षाणि तदर्द्धे ताम्रपत्रके।।75।। सोना पर लिखा हुआ जीवनपर्यन्त, चाँदी पर बीस वर्ष, भोजपत्र पर बारह वर्ष और ताँबा पर लिखा हुआ छह वर्ष तक यन्त्र प्रभावशाली रहता है। एवं लिख्य विशेषेण यन्त्रशक्तिं प्रतिष्ठिताम्¹। एतां ²रामबलोपेतामित्यादिश्लोकषट्कम्।।76।। यन्त्राद् बहिःप्रदेशे तु वृत्ताकारं यथालिखेत्।
- क. यंत्रशक्तिंप्रतिष्ठिता।
- ये छह श्लोक बुधकौशिक-प्रोक्त रामरक्षास्तोत्र में इस प्रकार उपलब्ध होते हैं- एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्।।10।। पाताल-भूतल-व्योमचारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः।।11।। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति।।12।। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः।।13।। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्।14।। आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः। तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः।।15।। (रामरक्षास्तोत्र श्लोक सं.10-15)