अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआमुख – आचार्य किशोर कुणाल 'अगस्त्य-संहिता' रामोपासना का महत्त्वपूर्ण एवं प्राचीन वैष्णवागम- शास्त्रीय ग्रन्थ है। इसका उल्लेख हेमाद्रि के 'चतुर्वर्ग-चिन्तामणि' से लेकर आधुनिक काल तक के शास्त्रीय ग्रन्थों में हुआ है। हेमाद्रि (13वीं शती) ने 'चतुर्वर्ग- चिन्तामणि' में; माधवाचार्य (14वीं शती) ने 'कालमाधव' में; मिथिला के महेश ठाकुर (16वीं शती) ने 'तिथितत्त्वचिन्तामणि' में तथा कमलाकर भट्ट (17वीं शती) ने 'निर्णयसिन्धु' में रामनवमी-तिथि के निर्धारण के प्रसंग में इसके सुसंगत श्लोकों को उद्धृत किया है। मिथिला के प्रसिद्ध आगमाचार्य देवनाथ ठाकुर ने 1564 ई. में 'मन्त्रकौमुदी' की रचना की, जिसमें उन्होंने पाँच स्थलों पर आगमशास्त्र के विभिन्न सिद्धान्तों और विधियों के प्रमाण के रूप में 'अगस्त्य-संहिता' को उद्धृत किया है। हेमाद्रि के 'चतुर्वर्ग-चिन्तामणि' में इसके कम से कम 32 श्लोक उद्धृत किये गये हैं। किन्तु आधुनिक काल में 'अगस्त्य-संहिता' की सर्वाधिक चर्चा रामानन्दाचार्य के चरित-लेखन के सन्दर्भ में हुई है। हिन्दी साहित्य के इतिहासकारों ने इस ग्रन्थ को उद्धृत करते हुए रामानन्दाचार्य का काल प्रामाणिक स्रोत के आधार पर निर्धारित करने का दावा किया है। किन्तु शोध के उपरान्त पाया गया कि मूल 'अगस्त्य-संहिता में रामानन्दाचार्य की कोई चर्चा नहीं है। यह चर्चा हो भी नहीं सकती है; क्योंकि 'अगस्त्य-संहिता' रामानन्दाचार्य से बहुत पहले की शास्त्रीय रचना है। 'दलित-देवो भव' पुस्तक में रामानन्दाचार्य की जीवनी लिखने के सन्दर्भ में मूल 'अगस्त्य संहिता' के अन्वेषण की आवश्यकता पड़ी। अनेक विद्वानों द्वारा लिखी हुई रामानन्द-जीवनी में यह पढ़ने को मिला था कि 'अगस्त्य-संहिता' के आधार पर रामानन्दाचार्य का जन्म सन् 1299 ई० में हुआ था। इसके समर्थन में 'अगस्त्य-संहिता' के ये श्लोक भी उद्धृत किये जाते रहे हैं-