अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
पृष्ठ 86, कुल 337 में से
संदर्भ में पढ़ेंपञ्चमः अध्यायः (25) एवमादिभिरन्यैश्च पुष्पैर्बहुभिरन्वहम्। सम्यक् सम्पाद्य यत्नेन शक्त्या भक्त्या रघूद्वहम्।।२९।। इसलिए पुण्यमयी स्त्रियाँ और गृहस्थ जो मंगल चाहते हों, वे दान करें और मांगलिक पूजा सामग्रियों चन्दन, अगरु, कस्तूरी, कर्पूर से पूजा करें; पंचामृत से अभिषेक करें; फूलों की माला, दूर्वा, अक्षत से तथा चम्पा, तामरस (लालकमल), नीलकमल, जूही, चम्पा, चमेली, नागकेसर, करवीर, वकुल, बेल का फूल, कदम्ब, केतकी फूल, मल्लिका, अशोक, पलाश, नाग, बाण आदि सुन्दर, सुगन्धित फूलों से अर्चना करें, जिनकी पंखुरियाँ आगे की ओर हों, कोमल हों, इनसे पूजा करें। नये पल्लव, जल एवं स्थल पर उत्पन्न पत्रों से तथा इस प्रकार के अन्य पत्रों-पुष्पों से प्रतिदिन शक्ति के अनुसार सभी सामग्रियाँ जुटाकर श्रीराम की पूजा करें। त्रिकालमेककालं वा पूजयेयुरहर्निशम्। ¹कक्कोलैलापूगफलैस्तथाजातिफलैरपि । प्रत्याहृतैर्बहुविधैः पिष्टकैरिष्टसिद्धये ।।३०।। दिन-रात, प्रातःकाल, मध्याह्नकाल एवं सन्ध्याकाल अथवा केवल प्रातःकाल में कक्कोल, इलायची, सुपारी, जायफल आदि अनेक प्रकार के संगृहीत साधनों से तथा चावल के पीठा से कामना की सिद्धि के लिए पूजा करें। क्षीरनीराज्यपक्वैश्च फेनापूपवटादिभिः। दध्योदनान्यपानीयैः सूपादिव्यञ्जनैरपि ।।३१।। ²वटीवटोपदंशादिपदार्थैर्बहुविस्तरैः । दूध, जल और घी में पकाये हुए फेना, फेन की तरह बनने वाला खाद्य पदार्थ बतासा, घेबर आदि, बड़ी तथा दही, भात, अन्य पेय पदार्थ और दाल, तरकारी, रोटी, गोलाकार खाद्य पदार्थ, चटनी या आचार आदि विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों से पूजा करें। आरातिकैर्धूपदीपैः³ षडावृत्त्योपकल्पितैः ।।३२।। ⁴शङ्खक्रगदापद्मगरुडान्तोपकल्पितैः । बहुभिर्दीपमालाभिरर्चयेयुरहर्निशम् ।।३३।। धूप, दीप, आरती से छह बार शङ्ख, चक्र गदा, कमल, तथा गरुड़ की प्रतिकृति बनाते हुए अनेक दीप मालाओं से दिन-रात पूजा करनी चाहिए।
- यह पंक्ति केवल घ. में। 2. घ. शाटीपटोपदंशादि (भोज्य पदार्थ के साथ वस्त्र अन्वित)। 3. घ. आरत्रिकै°। 4. घ. यह पंक्ति अनुपलब्ध।