अग्नि पुराण

अग्नि पुराण
Agni Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished878 पृष्ठ
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| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| १७२- | समस्त पापनाशक स्तोत्र ............................. | ३५४ | २०९- | धनके प्रकार; देश-काल और पात्रका विचार; पात्रभेदसे दानके फल-भेद; द्रव्य-देवताओं तथा दान-विधिका कथन........................... | ३९४ |
| १७३- | अनेकविध प्रायश्चित्तोंका वर्णन .................... | ३५५ | २१०- | सोलह महादानोंके नाम; दस मेरुदान, दस धेनुदान और विविध गोदानोंका वर्णन ........ | ३९८ |
| १७४- | प्रायश्चित्तोंका वर्णन ................................... | ३५९ | २११- | नाना प्रकारके दानोंका वर्णन ...................... | ४०० |
| १७५- | व्रतके विषयमें अनेक ज्ञातव्य बातें ............. | ३६० | २१२- | विविध काम्य-दान एवं मेरुदानोंका वर्णन .... | ४०३ |
| १७६- | प्रतिपदा तिथिके व्रत ................................. | ३६४ | २१३- | पृथ्वीदान तथा गोदानकी महिमा.................. | ४०५ |
| १७७- | द्वितीया तिथिके व्रत ................................ | ३६४ | २१४- | नाड़ीचक्रका वर्णन ................................... | ४०६ |
| १७८- | तृतीया तिथिके व्रत ................................. | ३६६ | २१५- | संध्या-विधि .......................................... | ४०८ |
| १७९- | चतुर्थी तिथिके व्रत ................................. | ३६८ | २१६- | गायत्री-मन्त्रके तात्पर्यार्थका वर्णन.................. | ४११ |
| १८०- | पञ्चमी तिथिके व्रत .................................. | ३६९ | २१७- | गायत्रीसे निर्वाणकी प्राप्ति ........................ | ४१३ |
| १८१- | षष्ठी तिथिके व्रत .................................... | ३६९ | २१८- | राजाके अभिषेककी विधि ........................... | ४१३ |
| १८२- | सप्तमी तिथिके व्रत ................................. | ३६९ | २१९- | राजाके अभिषेकके समय पढ़नेयोग्य मन्त्र ..... | ४१५ |
| १८३- | अष्टमी तिथिके व्रत ................................. | ३७० | २२०- | राजाके द्वारा अपने सहायकोंकी नियुक्ति और उनसे काम लेनेका ढंग........................ | ४१८ |
| १८४- | अष्टमी-सम्बन्धी विविध व्रत ..................... | ३७१ | २२१- | अनुजीवियोंका राजाके प्रति कर्तव्यका वर्णन.. | ४१९ |
| १८५- | नवमी तिथिके व्रत ................................... | ३७३ | २२२- | राजाके दुर्ग, कर्तव्य तथा साध्वी स्त्रीके धर्मका वर्णन .......................................... | ४२० |
| १८६- | दशमी तिथिके व्रत ................................... | ३७४ | २२३- | राष्ट्रकी रक्षा तथा प्रजासे कर लेने आदिके विषयमें विचार ......................................... | ४२२ |
| १८७- | एकादशी तिथिके व्रत ............................... | ३७४ | २२४- | अन्तःपुरके सम्बन्धमें राजाके कर्तव्य; स्त्रीकी विरक्ति और अनुरक्तिकी परीक्षा तथा सुगन्धित पदार्थोंके सेवनका प्रकार ........................... | ४२४ |
| १८८- | द्वादशी तिथिके व्रत ................................. | ३७५ | २२५- | राज-धर्म—राजपुत्र-रक्षण आदि ................ | ४२७ |
| १८९- | श्रवणद्वादशी-व्रतका वर्णन ......................... | ३७५ | २२६- | पुरुषार्थकी प्रशंसा; साम आदि उपायोंका प्रयोग तथा राजाकी विविध देवरूपताका प्रतिपादन ..... | ४२८ |
| १९०- | अखण्ड-द्वादशी-व्रतका वर्णन ..................... | ३७७ | २२७- | अपराधोंके अनुसार दण्डके प्रयोग............... | ४३० |
| १९१- | त्रयोदशी तिथिके व्रत ................................. | ३७७ | २२८- | युद्ध-यात्राके सम्बन्धमें विचार.................... | ४३४ |
| १९२- | चतुर्दशी-सम्बन्धी व्रत ............................... | ३७८ | २२९- | अशुभ और शुभ स्वप्नोंका विचार ................ | ४३५ |
| १९३- | शिवरात्रि-व्रत ........................................ | ३७९ | २३०- | अशुभ और शुभ शकुन............................. | ४३६ |
| १९४- | अशोकपूर्णिमा आदि व्रतोंका वर्णन .............. | ३७९ | २३१- | शकुनके भेद तथा विभिन्न जीवोंके दर्शनसे होनेवाले शुभाशुभ फलका वर्णन ................. | ४३७ |
| १९५- | वार-सम्बन्धी व्रतोंका वर्णन ....................... | ३८० | २३२- | कौए, कुत्ते, गौ, घोड़े और हाथी आदिके द्वारा होनेवाले शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन....... | ४३९ |
| १९६- | नक्षत्र-सम्बन्धी व्रत ................................. | ३८० | २३३- | यात्राके मुहूर्त और द्वादश राजमण्डलका विचार................................................... | ४४१ |
| १९७- | दिन-सम्बन्धी व्रत................................... | ३८२ | २३४- | दण्ड, उपेक्षा, माया और साम आदि नीतियोंका उपयोग..................................... | ४४३ |
| १९८- | मास-सम्बन्धी व्रत ................................... | ३८३ | २३५- | राजाकी नित्यचर्या .................................. | ४४४ |
| १९९- | ऋतु, वर्ष, मास, संक्रान्ति आदि विभिन्न व्रतोंका वर्णन ......................................... | ३८४ | |||
| २००- | दीप-दान-व्रतकी महिमा एवं विदर्भराज-कुमारी ललिताका उपाख्यान................... | ३८४ | |||
| २०१- | नवव्यूहार्चन ............................................ | ३८६ | |||
| २०२- | देवपूजाके योग्य और अयोग्य पुष्प ............. | ३८७ | |||
| २०३- | नरकोंका वर्णन ......................................... | ३८८ | |||
| २०४- | मासोपवास व्रत ....................................... | ३८९ | |||
| २०५- | भीष्मपञ्चकव्रत ........................................ | ३९१ | |||
| २०६- | अगस्त्यके उद्देश्यसे अर्घ्यदान एवं उनके पूजनका कथन......................................... | ३९१ | |||
| २०७- | कौमुद-व्रत ............................................. | ३९३ | |||
| २०८- | व्रतदानसमुच्चय........................................ | ३९४ |