अग्नि पुराण

अग्नि पुराण
Agni Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished878 पृष्ठ
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| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्य |
|---|---|---|---|---|---|
| १०७- | भुवनकोष (पृथ्वी-द्वीप आदि)-का तथा स्वायम्भुव सर्गका वर्णन | २३२ | १४१- | छत्तीस कोष्ठोंमें निर्दिष्ट ओषधियोंके वैज्ञानिक प्रभावका वर्णन | ३०१ |
| १०८- | भुवनकोश-वर्णनके प्रसंगमें भूमण्डलके द्वीप आदिका परिचय | २३३ | १४२- | चोर और जातकका निर्णय, शनि-दृष्टि, दिन-राहु, फणि-राहु, तिथि-राहु तथा विष्टि-राहुके फल और अपराजिता-मन्त्र एवं ओषधिका वर्णन | ३०२ |
| १०९- | तीर्थ-माहात्म्य | २३५ | १४३- | कुब्जिका-सम्बन्धी न्यास एवं पूजनकी विधि | ३०५ |
| ११०- | गङ्गाजीकी महिमा | २३६ | १४४- | कुब्जिकाकी पूजा-विधिका वर्णन | ३०७ |
| १११- | प्रयाग-माहात्म्य | २३६ | १४५- | मालिनी आदि नाना प्रकारके मन्त्र और उनके षोढा-न्यास | ३०९ |
| ११२- | वाराणसीका माहात्म्य | २३७ | १४६- | त्रिखण्डी-मन्त्रका वर्णन; पीठस्थानपर पूजनीय शक्तियों तथा आठ अष्टक देवियोंका कथन | ३११ |
| ११३- | नर्मदा-माहात्म्य | २३८ | १४७- | गुह्यकुब्जिका, नवा त्वरिता तथा दूतियोंके मन्त्र एवं न्यास-पूजन आदिका वर्णन | ३१३ |
| ११४- | गया-माहात्म्य | २३८ | १४८- | संग्राम-विजयदायक सूर्य-पूजनका वर्णन | ३१४ |
| ११५- | गया-यात्राकी विधि | २४२ | १४९- | होमके प्रकार-भेद एवं विविध फलोंका कथन | ३१४ |
| ११६- | गयामें श्राद्धकी विधि | २४६ | १५०- | मन्वन्तरोंका वर्णन | ३१५ |
| ११७- | श्राद्ध-कल्प | २४८ | १५१- | वर्ण और आश्रमके सामान्य धर्म, वर्णों तथा विलोमज जातियोंके विशेष धर्म | ३१७ |
| ११८- | भारतवर्षका वर्णन | २५४ | १५२- | गृहस्थकी जीविका | ३१८ |
| ११९- | जम्बू आदि महाद्वीपों तथा समस्त भूमिके विस्तारका वर्णन | २५५ | १५३- | संस्कारोंका वर्णन और ब्रह्मचारीके धर्म | ३१८ |
| १२०- | भुवनकोश-वर्णन | २५६ | १५४- | विवाहविषयक बातें | ३२० |
| १२१- | ज्योतिःशास्त्रका कथन | २५९ | १५५- | आचारका वर्णन | ३२१ |
| १२२- | कालगणना—पञ्चाङ्गमान-साधन | २६३ | १५६- | द्रव्य-शुद्धि | ३२३ |
| १२३- | युद्धजयार्णव-सम्बन्धी विविध योगोंका वर्णन | २६६ | १५७- | मरणाशौच तथा पिण्डदान एवं दाह-संस्कार-कालिक कर्तव्यका कथन | ३२४ |
| १२४- | युद्धजयार्णवीय ज्योतिषशास्त्रका सार | २७२ | १५८- | गर्भस्राव आदि सम्बन्धी अशौच | ३२६ |
| १२५- | युद्धजयार्णव-सम्बन्धी अनेक प्रकारके चक्रोंका वर्णन | २७३ | १५९- | असंस्कृत आदिकी शुद्धि | ३३२ |
| १२६- | नक्षत्र-सम्बन्धी पिण्डका वर्णन | २७७ | १६०- | वानप्रस्थ-आश्रम | ३३३ |
| १२७- | विभिन्न बलोंका वर्णन | २७९ | १६१- | संन्यासीके धर्म | ३३४ |
| १२८- | कोटचक्रका वर्णन | २८० | १६२- | धर्मशास्त्रका उपदेश | ३३६ |
| १२९- | अर्धकाण्डका प्रतिपादन | २८२ | १६३- | श्राद्धकल्पका वर्णन | ३३७ |
| १३०- | विविध मण्डलोंका वर्णन | २८२ | १६४- | नवग्रह-सम्बन्धी हवनका वर्णन | ३४१ |
| १३१- | घातचक्र आदिका वर्णन | २८३ | १६५- | विभिन्न धर्मोंका वर्णन | ३४२ |
| १३२- | सेवा-चक्र आदिका निरूपण | २८६ | १६६- | वर्णाश्रम-धर्म आदिका वर्णन | ३४३ |
| १३३- | नाना प्रकारके बलोंका विचार | २८८ | १६७- | ग्रहोंके अयुत-लक्ष-कोटि हवनोंका वर्णन | ३४४ |
| १३४- | त्रैलोक्यविजया-विद्या | २९१ | १६८- | महापातकोंका वर्णन | ३४७ |
| १३५- | संग्रामविजय-विद्या | २९२ | १६९- | ब्रह्महत्या आदि विविध पापोंके प्रायश्चित्त | ३४८ |
| १३६- | नक्षत्रोंके त्रिनाडी-चक्र या फणीश्वरचक्रका वर्णन | २९५ | १७०- | विभिन्न प्रायश्चित्तोंका वर्णन | ३५० |
| १३७- | महामारी-विद्याका वर्णन | २९५ | १७१- | गुप्त पापोंके प्रायश्चित्तका वर्णन | ३५३ |
| १३८- | तन्त्रविषयक छः कर्मोंका वर्णन | २९७ | |||
| १३९- | साठ संवत्सरोंमें मुख्य-मुख्यके नाम एवं उनके फल-भेदका कथन | २९८ | |||
| १४०- | वश्य आदि योगोंका वर्णन | २९९ |