अग्नि पुराण

अग्नि पुराण
Agni Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished878 पृष्ठ
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| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| ४६ - | शालग्राम-मूर्तियोंके लक्षण | ९३ | ७५ - | शिवपूजाके अङ्गभूत होमकी विधि | १५३ |
| ४७ - | शालग्राम-विग्रहोंकी पूजाका वर्णन | ९४ | ७६ - | चण्डकी पूजाका वर्णन | १५७ |
| ४८ - | चतुर्विंशति-मूर्तिस्तोत्र एवं द्वादशाक्षर स्तोत्र | ९५ | ७७ - | घरकी कपिला गाय, चूल्हा, चक्की, ओखली, मूसल, झाडू और खंभे आदिका पूजन एवं प्राणाग्निहोत्रकी विधि | १५८ |
| ४९ - | मत्स्यादि दशावतारोंकी प्रतिमाओंके लक्षणोंका वर्णन | ९६ | |||
| ५० - | चण्डी आदि देवी-देवताओंकी प्रतिमाओंके लक्षण | ९८ | ७८ - | पवित्राधिवासनकी विधि | १६० |
| ५१ - | सूर्यादि ग्रहों तथा दिक्पाल आदि देवताओंकी प्रतिमाओंके लक्षणोंका वर्णन | १०२ | ७९ - | पवित्रारोपणकी विधि | १६५ |
| ५२ - | चौंसठ योगिनी आदिकी प्रतिमाओंके लक्षण | १०४ | ८० - | दमनकारोपणकी विधि | १६७ |
| ५३ - | लिङ्ग आदिका लक्षण | १०५ | ८१ - | समयाचार-दीक्षाकी विधि | १६८ |
| ५४ - | लिङ्ग-मान एवं व्यक्ताव्यक्त लक्षण आदिका वर्णन | १०७ | ८२ - | समय-दीक्षाके अन्तर्गत संस्कार-दीक्षाकी विधिका वर्णन | १७७ |
| ५५ - | पिण्डिकाका लक्षण | १११ | ८३ - | निर्वाण-दीक्षाके अन्तर्गत अधिवासनकी विधि | १७९ |
| ५६ - | प्रतिष्ठाके अङ्गभूत मण्डपनिर्माण, तोरण-स्तम्भ, कलश एवं ध्वजके स्थापन तथा दस दिक्पाल-यागका वर्णन | ११२ | ८४ - | निर्वाण-दीक्षाके अन्तर्गत निवृत्तिकला-शोधन-विधि | १८२ |
| ५७ - | कलशाधिवासकी विधिका वर्णन | ११४ | ८५ - | निर्वाण-दीक्षाके अन्तर्गत प्रतिष्ठाकलाके शोधनकी विधिका वर्णन | १८४ |
| ५८ - | भगवद्विग्रहको स्नान और शयन करानेकी विधि | ११५ | ८६ - | निर्वाण-दीक्षाके अन्तर्गत विद्याकलाका शोधन | १८७ |
| ५९ - | अधिवास-विधिका वर्णन | ११९ | ८७ - | निर्वाण-दीक्षाके अन्तर्गत शान्तिकलाका शोधन | १८९ |
| ६० - | वासुदेव आदि देवताओंके स्थापनकी साधारण विधि | १२२ | ८८ - | निर्वाण-दीक्षाकी अवशिष्ट विधिका वर्णन | १९० |
| ६१ - | अवभृथस्नान, द्वारप्रतिष्ठा और ध्वजारोपण आदिकी विधिका वर्णन | १२४ | ८९ - | एकतत्त्व-दीक्षाकी विधि | १९३ |
| ६२ - | लक्ष्मी आदि देवियोंकी प्रतिष्ठाकी सामान्य विधि | १२७ | ९० - | अभिषेक आदिकी विधिका वर्णन | १९३ |
| ६३ - | विष्णु आदि देवताओंकी प्रतिष्ठाकी सामान्य विधि तथा पुस्तक-लेखन-विधि | १२८ | ९१ - | देवार्चनकी महिमा तथा विविध मन्त्र एवं मण्डलका कथन | १९४ |
| ६४ - | कुआँ, बावड़ी और पोखरे आदिकी प्रतिष्ठाकी विधि | १३० | ९२ - | प्रतिष्ठाके अङ्गभूत शिलान्यासकी विधिका वर्णन | १९६ |
| ६५ - | सभा-स्थापन और एकशालादि भवनके निर्माण आदिकी विधि, गृहप्रवेशका क्रम तथा गोमातासे अभ्युदयके लिये प्रार्थना | १३२ | ९३ - | वास्तुपूजा-विधि | २०० |
| ९४ - | शिलान्यासकी विधि | २०२ | |||
| ६६ - | देवता-सामान्य-प्रतिष्ठा | १३४ | ९५ - | प्रतिष्ठा-काल-सामग्री आदिकी विधिका कथन | २०३ |
| ६७ - | जीर्णोद्धार-विधि | १३६ | ९६ - | प्रतिष्ठामें अधिवासकी विधि | २०७ |
| ६८ - | उत्सव-विधिका कथन | १३६ | ९७ - | शिव-प्रतिष्ठाकी विधि | २१४ |
| ६९ - | स्नपनोत्सवके विस्तारका वर्णन | १३७ | ९८ - | गौरी-प्रतिष्ठा-विधि | २१९ |
| ७० - | वृक्षोंकी प्रतिष्ठाकी विधि | १३८ | ९९ - | सूर्यदेवकी स्थापनाकी विधि | २२० |
| ७१ - | गणपतिपूजनकी विधि | १३९ | १०० - | द्वार-प्रतिष्ठा-विधि | २२० |
| ७२ - | स्नान, संध्या और तर्पणकी विधिका वर्णन | १३९ | १०१ - | प्रासाद-प्रतिष्ठा | २२१ |
| ७३ - | सूर्यदेवकी पूजा-विधिका वर्णन | १४४ | १०२ - | ध्वजारोपण | २२२ |
| ७४ - | शिवपूजाकी विधि | १४६ | १०३ - | शिवलिङ्ग आदिके जीर्णोद्धारकी विधि | २२४ |
| १०४ - | प्रासादके लक्षण | २२५ | |||
| १०५ - | नगर, गृह आदिकी वास्तु-प्रतिष्ठा-विधि | २२७ | |||
| १०६ - | नगर आदिके वास्तुका वर्णन | २३१ |