ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 228, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ेंपाँचवाँ अध्याय ४५—एक बार यज्ञ देवों को छोड़कर अन्नादि में चला गया। देवों ने कहा "यज्ञ हमको छोड़कर अन्नादि में चला गया है। हम चाहते हैं कि यज्ञ को भी ले आवें और अन्नादि को भी। उन्होंने विचारा कि कैसे लावें। तो उन्होंने कहा, "ब्राह्मण और छन्दों के द्वारा।" उन्होंने एक ब्राह्मण को छन्दों से दीक्षित किया। उसमें दीक्षणीय इष्टि से लेकर "पत्नी: समयाज" तक पूरा पूरा कृत्य किया। चूंकि देवों ने दीक्षणीय इष्टि से लेकर पत्नी- समयाज तक सब कृत्य किया इसीलिये मनुष्य भी उन्हीं का अनुकरण करते हैं। उन्होंने प्रायणीय इष्टि के द्वारा यज्ञ का सामीप्य प्राप्त किया। उन्होंने इष्टि को जल्दी जल्दी किया। और उसको शंयुवाक् से समाप्त किया। इसलिये प्रायणीय इष्टि शंयुवाक् से समाप्त हुआ करती है। क्योंकि मनुष्यों ने इस बात में देवों का अनुकरण किया। देवों ने आतिथ्य-इष्टि के द्वारा यज्ञ का सामीप्य प्राप्त किया। उन्होंने जल्दी जल्दी इष्टि को इला से समाप्त कर दिया। इसलिये आतिथ्य इष्टि भी इला से समाप्त होती है क्योंकि मनुष्यों ने इस में भी अनुकरण किया। ( २१४ )