भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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पाँचवाँ अध्याय २९—पहले दिन का देवता अग्नि है। स्तोम त्रिवृत् है, साम रथंतर है और छन्द गायत्री है। जो समझता है कि देवता कौन है वह सफल हो जाता है । ‘आ’ और ‘प्र’ पहले दिन के रूप (विशेषतायें) हैं। प्रथम दिन की विशेषतायें यह भी हैं :— ‘युक्त’, ‘रथ’, ‘आशु’, ‘पिव’ यह शब्द अवश्य आयेंगे । मन्त्रों के पहले पाद में देवताओं का स्पष्ट नाम होगा । इस लोक अर्थात् पृथ्वी के विषय में कुछ होगा । रथंतर के समान साम होंगे । गायत्री के लगभग छन्द होगा । और ‘कृ’ धातु का भविष्यकाल का कोई रूप होगा । पहले दिन का आज्य सूक्त यह है :— उपप्रयन्तो अध्वरं ( ऋ० १।७४।१ ) क्योंकि इस में ‘प्र’ आया है । ‘प्र’ पहले दिन का रूप (विशेषता) है । प्रउग शस्त्र है “वायवायाहि दर्शत” ( ऋ० १।२।१-३ ) क्योंकि इसमें ‘आ’ आया है । ‘आ’ पहले दिन का रूप है । ( २६७ )