ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 281, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ेंपाँचवाँ अध्याय २९—पहले दिन का देवता अग्नि है। स्तोम त्रिवृत् है, साम रथंतर है और छन्द गायत्री है। जो समझता है कि देवता कौन है वह सफल हो जाता है । ‘आ’ और ‘प्र’ पहले दिन के रूप (विशेषतायें) हैं। प्रथम दिन की विशेषतायें यह भी हैं :— ‘युक्त’, ‘रथ’, ‘आशु’, ‘पिव’ यह शब्द अवश्य आयेंगे । मन्त्रों के पहले पाद में देवताओं का स्पष्ट नाम होगा । इस लोक अर्थात् पृथ्वी के विषय में कुछ होगा । रथंतर के समान साम होंगे । गायत्री के लगभग छन्द होगा । और ‘कृ’ धातु का भविष्यकाल का कोई रूप होगा । पहले दिन का आज्य सूक्त यह है :— उपप्रयन्तो अध्वरं ( ऋ० १।७४।१ ) क्योंकि इस में ‘प्र’ आया है । ‘प्र’ पहले दिन का रूप (विशेषता) है । प्रउग शस्त्र है “वायवायाहि दर्शत” ( ऋ० १।२।१-३ ) क्योंकि इसमें ‘आ’ आया है । ‘आ’ पहले दिन का रूप है । ( २६७ )