ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२८४ [पाँचवीं पञ्चिका त्रिषधस्था सप्तधातुः पञ्चजाता वर्धयन्ती । वाजे वाजे हव्या भूत् ॥ (ऋ० ६।६१।१०-१२) यह सब उष्णिक् छन्द में हैं और इनमें समानोदर्क है । यह तीसरे दिन का रूप है । मरुत्वतीय शस्त्र का प्रतिपद् यह है :— तन्तमिन्द्राधसे मह इन्द्रं चोदामि पीतये । यः पूर्व्यामनुष्टुतिमीशे कृष्टीनां नृतुः ॥ (ऋ० ८।६८।७) न यस्य ते शवसान सख्यमानंश मर्त्यः । नकिः शवांसि ते नशत् ॥ (ऋ० ८।६८।८) त्वोतासस्त्वा युजाऽप्सु सूर्ये महद्धनम् । जयेम पृत्सु वज्रिवः ॥ (ऋ० ८।६८।९) इसका अनुचर यह है :— त्रय इन्द्रस्य सोमाः सुतासः सन्तु देवस्य । स्वे क्षये सुतपान्व ॥ त्रयः कोशासः श्चोतन्ति तिस्रश्चम्वः सुपूर्णाः । समाने अधिमार्मन् ॥ शुचिरसि पुरुनिःष्ठाः क्षीरैर्मन्थत आशीर्तः । दध्ना मन्दिष्ठः शूरस्य ॥ (ऋ० ८।२।७-९) इनमें 'नृतुः' और 'त्रयः' यह शब्द आये हैं । यह तीसरे दिन का रूप है । इन्द्र-निहिव प्रगाथ वही है—इन्द्रनेदीय... (ऋ० ८।५३।५-७) ब्रह्मणस्पति प्रगाथ यह है :— प्रनूनं ब्रह्मणस्पतिर्मन्त्रं वदत्युक्थ्यम् । यस्मिन्निन्द्रो वरुणो मित्रो अर्यमा देवा ओकांसि चक्रिरे ॥ तमिद्धोचेमा विदथेषु शम्भुवं मन्त्रं देवा अनेहसम् । इमां च वाचं प्रतिहर्यथा नरो विश्वेद् वामा वो अश्नवत् ॥ (ऋ० १।४०।५-६) इसमें स्वरों की समानता है । यह तीसरे दिन का रूप है । धाय्या वही है :— अग्निनेता (ऋ० ३।२०।४)