भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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पृष्ठ 343

चौथा अध्याय २०—यह जो समानोदर्क है वह नवें दिन का रूप हैं यह वही है जो तीसरे दिन का। इसकी विशेषतायें यह हैं :- अश्व, अन्त, पुनरावृत्ति, पुनर्निवृत्ति, रमण करना, पर्यास, तीन की संख्या, अन्त का रूप, अन्त के पद में देवता का निर्वचन, स्वर्ग लोक का उल्लेख, शुचि, सत्य, क्षेति अर्थात् रहना, गत (गुज़र जाना), ओक (घर) और भूतकालिक क्रिया। यह तीसरे दिन के रूप हैं। यही नवें दिन के भी। नवें दिन का आज्य सूक्त यह हैं :— अगन्म महा नमसा यविष्ठम् (ऋ० ७।१।२) इसमें 'गत' शब्द है। यह नवें दिन का रूप हैं। छन्द त्रिष्टुभ् है। इस त्र्यह के प्रातः सवन का छन्द त्रिष्टुभ् है। प्र उग शस्त्र के मंत्र यह हैं:— प्र-वीरया शुचयो दद्रिरे वामध्वयु भिर्मधुमन्तः सुतासः। वह वायो। नियुतो याह्यच्छा पिबा सुतस्यान्धसोमदाय ॥ ( ऋ० ७।६०।१ ) ( ३२९ )