भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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पृष्ठ 444

४३० [ सातवीं पञ्चिका १४--फिर नारद ने उससे कहा, "राजा 'वरुण के पास जाओ और कहो कि मुझे पुत्र दो। मैं उस पुत्र से तुम्हारा यज्ञ करूँगा"। उसने कहा, 'अच्छा'। वह राजा वरुण के पास गया और कहने लगा, "मुझे पुत्र मिल जाय तो मैं तेरा यज्ञ करूँ"। उसने कहा, "अच्छा"। उसके रोहित नाम का पुत्र हुआ। वरुण ने कहा, "तेरे पुत्र हो गया, तू उससे मेरा यज्ञ कर"। उसने कहा, "जब पशु दस दिन का हो जाय तो तेरा यज्ञ करूँ"। उसने कहा, 'अच्छा'। जब वह दस दिन का हो गया तब वरुण ने उससे कहा, "अब तो यह दस दिन का हो गया। अब तू इससे मेरा यज्ञ कर"। हरिश्चन्द्र ने कहा, "जब पशु के दाँत हो जाते हैं तब वह यज्ञ के योग्य होता है। इसके दाँत निकल आने दे, तब मैं इससे तेरा यज्ञ करूँगा'। उसने कहा, "अच्छा"। उसके दाँत निकल आये। तब वरुण ने कहा, "अब इसके दाँत निकल आये। यज्ञ कर"। हरिश्चन्द्र ने कहा, "जब पशु के दाँत गिर पड़ते हैं तब वह यज्ञ के योग्य होता है। इसके दाँत गिर जाने दे तब मैं तेरा यज्ञ करूँगा"। उसने कहा, "अच्छा"। अब उसके दाँत गिर गये। तब वरुण ने कहा, "इसके दाँत तो गिर गये। अब यज्ञ कर"। हरिश्चन्द्र ने कहा, "जब पशु के दाँत दुबारा जमते हैं तब वह यज्ञ के योग्य होता है। इसके दाँत फिर जम आने दे, तब तेरा यज्ञ करूँगा"। उसने कहा, "अच्छा"। अब उसके दाँत फिर जम आये। वरुण ने कहा, "इसके दाँत तो फिर जम आये। तू मेरा यज्ञ कर"। हरिश्चन्द्र ने कहा, "जब क्षत्रिय शस्त्रधारी हो जाता है तब यज्ञ के योग्य होता है। इसको शस्त्रधारी हो जाने दे, तब इससे तेरा यज्ञ करूँगा"। उसने कहा, "अच्छा"। अब वह शस्त्रधारी हो गया। तब वरुण ने कहा, "अब यह शस्त्रधारी