भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 125, कुल 618 में से

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४ आल्हखण्ड । १२० अब तो बाबा कलियुग आये माता सहैं लात के घाय २३ सुनिकै बातें ये माता की सुनवाँ चरण शीश नवाय ॥ जो कछु भाषारहै सखियनने सुनवाँ मातै गई सुनाय २४ सुनिकै बातें सब कन्या की माता रही समय को देखि ॥ यकदिन ऐसा आनपहूँचा राजा रहा कन्यका पेखि २५ रानी बोली तब राजाते हमरे बचन करो परमान ॥ ब्याहन लायक यह कन्या भै सोतुमजानो नृपतिसुजान २६ सुनिकै बातें ये रानी की बिजिया बेटा लीन बुलाय ॥ नाई बारी को बुलवायो तिनते कह्योहालसमुझाय २७ जयो मोहोबे ना टीका लै सब कहुँ जाउ तुरतही धाये ॥ नाई बारी तुरतै चलिभे पहुँचे नगर नगर में जाय २८ काहू टीका को लीन्ह्यो ना. नैनागढ़ै पहुँचे आय ॥ खबरि सुनाई सब राजा को नेगिनचरणशीशनवाय २६ जालिम राजा नैनागढ़ का राजन यही विचारा जीय ॥ मारे डरके छाती धड़कै कैसेहोयँ तहांपर पीय ३० थोरी थोरी फौजें लैके नैनागढ़ै पहुँचे आय । नजरी दीन्ह्यो नेपाली को राजाचरण शीशनवाय ३१ सरवरि तुम्हरी का नाहीं हैं टीका लेयँ कहौ कस भाय । कुमक तुम्हारी को आयन है राजन सत्यदीन बतलाय ३२ त्यही समैया त्यहि औसरमाँ औ सुनवाँ को सुनो हवाल ॥ हीरामणि सुवनाको लैके सुनवाँ भई रोवासिनिबाल ३३ चूम्यो चाट्यो त्यहि सुवनाको औफिरिकह्योबचन यहगाय ॥ मेवा खायो भल पिंजरन में अब गाढ़े में होउ सहाय ३४ लैके पाती जाउ मोहोबे देवो उदयसिंह को जाय ॥

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