भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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[Header] आल्हाका विवाह । १४६ ३३

जहाँ कचहरी नयपाली की माहिल पहुंचिगये त्यहिबार ॥ दीख्यो माहिलको नयपाली राजै बड़ाकीन सतकार ७९ माहिल बोले तब राजाते तुम सुनिलेउ बिसेनेराय ॥ तीनों लड़िका तुम्हरे बँधिगे चौथो पूरन लये बँधाय ८० सुनवाँ ब्याहीगय आल्हा को तौ रजपूती जाय नशाय ॥ पानी पीहै कोउ क्षत्री ना तुमको सत्य दीन बतलाय ८१ राजा बोले तब माहिलते ठाकुर उरई के सरदार ॥ काह कलङ्की देशराज भे सो तुम कथा कहौ यहिबार ८२ माहिल बोले नयपाली ते सुनिल्यो बचन मोर महराज ॥ चले शिकारै देशराज बन दूसर बच्छराज शिरताज ८३ देवलि बिरमा दूनों बहिनी बेंचिनदही जायँ त्यहिराह ॥ मार्ग सँकोचो त्यहि बनजानो अरनालड़ैं तहाँ नरनाह ८४ पकरिकै सींगैं इक भैंसाकी देवलि दीन्ह्यो दूरि हटाय ॥ दूसर बिरमाने पकरा तहँ पाछे सोऊ पछिलाति जाय ८५ दूनों अरना मारग हटिगे दूनों जोड़ भये इकठोर ॥ देशराज कह बच्छराज सों दूनों बड़ी बली इकजोर ८६ इनको लैकै घरको चलिये होवैं पूत सुपूते भाय ॥ तिनहिन अहिरिन के पेटेते चारो भये बनाफरराय ८७ बाप छत्तरी माता अहिरिनि बेटा कैसे होयँ कुलीन ॥ ब्याह न कीन्ह्यो तुमसुनवाँ का जानोंजातिपांति अकुलीन ८८ पूजन कीन्ह्यो तब माहिल का राजै फेरि कीन सतकार ॥ बड़े पियारे तुम माहिल हौ ठाकुर उरई के सरदार ८९ बहिनि बियाही चंदेले घर जिनको कही रजा परिमाल ॥ किह्योमुलहिजानहिंतिनकोतुम हमसों सत्य कह्यो सबहाल ९०