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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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आल्हाका विवाह । १५३ ३७ सुनवाँ पूछ्यो जों मालिनि ते मालिनिखबरिदीनबतलाय १२५ रूप गुजरियाको सुनवाँ करि पहुंची नाह निकट सो जाय ॥ रूप देखिकै त्यहि गूजरिको मोहित भयो बनाफरराय १२६ जस बतलान्यो ये गूजरिसों गूजरि तैस दीन समुझाय ॥ मुंदरी दीन्ह्यो फिरि गूजरिको मालिनिघेरै पहुंची आय १२७ सब समुझायो फिरि ऊदन को सांचे हाल दीन बतलाय ॥ घोड़ करिलिया औ रसबेंदुल लैकै गयो लहुरवाभाय १२८ खबरि पायकै बयपारी कै द्वारे नृपति पहुंचा आय ॥ बनो कबुलिहा बघऊदन है सांचो आगा परै दिखाय १२६ राजा पूछ्यो बयपारी सों सांची कीमत देव बताय ॥ ऊदन बोल्यो नयपाली सों चढ़िकैदेखिलेयकोउआय १३० चाल देखिल्यो इन घोड़नकी पाछे कीमत देयँ बताय ॥ सुनिकै बातें ब्योपारी की राजै हुकुमदीन फर्माय १३१ जावैं क्षत्री जो घोड़न ढिग ताको टापन देयँ हटाय ॥ मुखसों काटैं ऊपर उलैरैं कोउरजपूतपास ना जाय १३२ देखि तमाशा यहु महाराजा तुरतै आल्हा लीन बुलाय ॥ घोड़ा फेरो तुम फाटक में इनकीचाल देव दिखराय १३३ किह्यो इशारा बघऊदन ने घोड़ा चढ़े बनाफरराय ॥ बैठ बेंदुलापर बघऊदन आपननामदीन बतलाय १३४ बाग उठायो दउ घोड़न की फाटक पार पहुंचे आय ॥ मालिनि घरते सुनवाँ चलिभै तुरतै पलकी लीन मँगाय १३५ तीनों पहुंचे फिरि लश्कर में डंका बजन लाग घहराय ॥ चलि भैं फौजैं मलखाने की पहुंचीं प्रागराज में आय १३६ जितने क्षत्री रहैं लश्कर में सबियाँ करनगये असनान ॥