आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमलखानका विवाह । १६९ १३ सुनिकै बातें ये रूपन की पहुँचा द्वारपाल दरबार ॥ झारि बिसेने सब बैठे हैं एकते एक शूर सरदार १२८ हाथ जोरि औ बिनती करिकै बोला द्वारपाल शिरनाय ॥ ऐपनावारी बारी लायो भारी नेग चहै ह्याँ आय १२९ चार पहरभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्तकी धार ॥ नेग आपनो बारी बोलै लीन्हे हाथ ढाल तलवार १३० सुनिकै बातें द्वारपाल की तब गजराजा उठा रिसाय ॥ बाँधिकै मुशकें त्यहि बारी की सूरज मोहिं दिखावै आय १३१ इतना सुनिकै मानसिंह तहँ द्वारे तुरत पहुँचा आय ॥ सेल चलायो त्यहि रूपनापर रूपनालीन्ह्यो वारबचाय १३२ मार्यो लटुवा फिरि भालाको शिरते चली खूनकी धार ॥ ऐँड़ा मसक्यो फिरि घोड़ी के फाटकनिकरिगयोवहिपार१३३ बहुतक दौरे फिरि पाछे सों धरु धरु मारु करें लतकार ॥ घोड़ी कबुतरी मलखेवाली नामी मोहबेका सरदार १३४ त्यहिके बलसों रूपन बारी बहुतन मारि मिलायो खार ॥ जायकै पहुँचा फिरि तम्बुन में भारी लाग जहाँ दरबार १३५. दीख्यो ऊदन तहँ रूपन का मानों फगुई का त्यवहार ॥ कैसी गुजरी रहै द्वारेपर बोले उदयसिंह सरदार १३६ सुनिकै बातें ये ऊदन की रूपन यथातथ्य गा गाय ॥ खेत छूटिगा दिननायक सों झंडागड़ा निशाको आय१३७ तारागण सब चमकन लागे संतन धुनी दीन परचाय ॥ परे आलसी खटिया.तकितकि घों घों कण्ठ रहा घर्राय १३८ करौं बन्दना गणनायक की दोनों चरणकमल शिरनाय ॥ शीश नवावों पितु अपने को मनमें सदा रामपदध्याय १३६