आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमलखानका बिवाह । १७१ १५ आदर करिकै बड़ माहिल का बोले मधुर बचन नरपाल १ ऐपनवारी बारी लायो कीन्ह्यो कठिन द्वार तलवार ॥ कैसे मरिहैं मोहबे वाले बोलो उरई के सरदार २ सुनिकै बातें ये राजा की माहिल बोले बचन उदार ॥ ज्यहि की नीकी बेटी ब्याखैं ऊदन गाँसैं तासु दुवार ३ मिर्चवान ब्याहे की पठवो तामें जहर देव मिलवाय ॥ बिना बयारी जूना टूटै औ बिन औषध हटै बलाय ४ बातें सुनिकै ये माहिल की राजा मनै फूलिगा भाय ॥ जहर घुरायो त्यहिं शर्बत माँ सूरज पुत्र दीन पठवाय ५ दिय जनवासा फिरि पथरीगढ़ पाछे शर्बत दीन पठाय ॥ आदर करिकै सूरज ठाकुर चाँदी आबखोर मँगवाय ६ लै अबखोरा भरि त्यहि शर्बत आल्हा पास पहुंचा जाय ॥ जब अबखोरा आल्हा लीन्ह्यों सम्मुख भई छींक तब आय ७ ऊदन बोले तब देवा ते अब तुम शकुन बताओ भाय ॥ देवा बोला तब ऊदन ते साँची सुनो लहुरवा भाय = कालरूप यहु शर्बत आयो सबकी मृत्यु गई नगच्याय ॥ धारि जनेऊ तब काने में सूरज उठा तड़ाका भाय ६ ऊदन बोले तब आल्हा ते कुत्ते देवो आप पियाय ॥ जो मरिजावै पी कुत्ता यह तौ सब जहर देव फिकवाय १० इतना सुनिकै नेगी चलिभे मारन लागि लहुरवा भाय ॥ बड़े दयालू आल्हा बोले ऊदन छाँड़ि देव यहि ठायाँ ११ प्रजा हमारी सम परजा हैं ठाकुर भागि गयो भयखाय ॥ नामी ठाकुर तुम मोहबे के इनपर दयाकरो यहि ठार्य १२ माधै राजा के नौकर हो तुम्हरो करै काह उपकार ॥