आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमलखानका विवाह । १६५ ३६
कंचुकि औ क्षुद्रावलि कंकण कुसुमित अम्बर चन्दन धारी ॥ खायकै पाने औ धारिमैंनैनको हौर औ नूपुरैंकी झनकारी । सेंदुरै भाल बिशाललखे ललिते मनलज्जित मन्मथनारी १०४ ग्वरिग्वरिबहियाँ हरिहरिचुरियाँ सो मनिहारिनि दी पहिराय ॥ पहिरि मुँदरियाँ अठो अँगुरियाँ ऊपर छल्ला लये दबाय १०५ पहिरि आरसी ली अँगुठा में सीसा उपर तासु के भाय ॥ अगे अगेला पिछे पछेला बीचम छन्न रही दर्शाय १०६ टाड़ैं पहिरी सोने वाली जोसन पट्टी करैं बहार ॥ दुलरी तिलरी पंचलरीलों तापर परा मोतियन हार १०७ नथुनी लटकन की शोभाअति कानन करनफूल शृङ्गार ॥ गैरे गुज्भी ढउकानन में बँदियाँ मस्तक करै वहार १०८ बिछिया पहिरी पद अँगुरिन में अनवट सखी दीन पहिराय ॥ कड़ाके ऊपर छड़ा बिराजै तापर पायजेब लहराय १०६ लहँगा पहिरयो कीनखाब को चादर ओढ़िलीन फिरिभाय ॥ जैसे बादल बिजुली चमकै तसगजमोतिनिपरै दिखाय ११० तहिले राजा फिरि आवत भे औ रानी सों कह्यो सुनाय ॥ बिदा कि बिरिया अब आई है जल्दी बेटी देउ पठाय १११ सुनिकै बातें ये राजा की रानी बेटी लीन बुलाय ॥ सीतामाता अनुसूया की सबियाँकथाकहीसमुझाय ११२ कहा न मानै जो पूरुष को नारी घोर नर्क को जाय ॥ चोर कुकर्मी जो पतिहोवै सेवा किहे नारि तरिजाय ११३ विनापराधे नारी त्यागै सो पति मरै भूखके घाय ॥ ऐसे कहिकै गजमोतिनि सों माता रोई हृदय लगाय ११४