आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माका विवाह । २०९ ५ चढ़ि दलगंजन की पीठि पर ताहर नाहर भयो तयार ॥ नाई बारी सँग में लीन्हे पहुँचे माहिल के दरबार ३६ आवत दीख्यो जब ताहर को माहिल बहुत गयो घबड़ाय ॥ माहिल बोले फिरि ताहर ते बेटा कुशल देउ बतलाय ३७ ताहर बोले फिरि माहिल ते ठाकुर उरई के सरदार ॥ टीका लाये हम बहिनी का घूमत बिते महीना चार ३८ कुँवर बनावो क्यहु क्षत्री का मोको पूत आपनो जान ॥ माहिल बोले तब ताहर ते मानो कही बीर चौहान ३६ अजयपाल कनउज का राजा राजन मध्य बीर सरदार ॥ ताको लड़का रतीभान भो जाकी जगजाहिर तलवार ४० ताको लड़का लाखनि राना टीका तासु चढ़ावो जाय ॥ इतना सुनिकै ताहर चौंड़ा तुरतै कूचदीन करवाय ४१ जायकै पहुँचे फिरि कनउज में जहँपर भरी लाग दरबार ॥ की गति बरणै चन्देले कै आली खानदान सरदार ४२ ताहर दीख्यो जब जयचँद को तुरतै कीन्ह्यो राम जुहार ॥ चिट्ठी दीन्ह्यो फिरि जल्दी सों लीन्ह्यो कनउजके सरदार ४३ पढ़िकै चिट्ठी राहुट द्वैगा नैना अग्निबरण भे लाल ॥ लै जाव चिट्ठी कहूँ अनतै को मेरो बड़ो पियारो बाल ४४ ताहर चौंड़ा दूनो जरिकै तुरतै कूच दीन करवाय ॥ पार उतरिकै श्रीयमुना के उरई निकट पहुंचे आय ४५ मलखे ठाकुर त्यहि समया में मारन आयो तहां शिकार ॥ ताहर चौंड़ा मलखे ठाकुर मारग भेंटिगये सरदार ४६ कुशल प्रश्न ताहर सों कहिकै बोला बचन बीर मलखान ॥ कौने मतलब को निकरेहौ नाहर दिल्लीके चौहान ४७