आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ आल्हखण्ड । २०२ सुनिकै बातें ई मलखे की ताहर हाल गयो सबगाय ॥ मलखे बोले फिरि ताहर सों लड़का तुम्हें देयँ बतलाय ४८ संग हमारे कछु दूरी तुम औरो चलो बीरचौहान ॥ इतना सुनिकै दूनों चलिभे मोहोबे गये तीनहू ज्वान ४६ ताहर बोले तहँ मलखे ते यहुहै कौन शहर मलखान ॥ मलखे बोले तहँ ताहर सों यहहै नगर मोहोबा ज्वान ५० यहँको राजा परिमालिक है ब्रह्मा लड़का तासु कुँवार ॥ तोरी बहिनी सों त्यहि ब्याहौं साँची बात मानु सरदार ५१ सुनिकै बातें ये मलखे की ताहर बहुत गयो शर्माय ॥ ऐसी बातें का तुम बोले ब्याह न करें बनाफरराय ५२ नहीं आज्ञा दिल्लीपति कै टीका नगर गोहोबे जाय ॥ सरबरि हमरी का नाहीं हैं ठाकुर काह गयो बौराय ५३ सुनिकै बातें ये ताहर की बोला बचन बीर मलखान ॥ धाँसि सिरोही मुँहमें देवों जोफिरि ऐस कहै चौहान ५४ इतनी सुनिकै ताहर ठाकुर पाती तुरत दीन पकराय ॥ मूड़ कटाई सो ब्याहे माँ नाहर जौन पिथौराराय ५५ ताका बाना जग मर्दाना मारै शब्द ताकिकै बान ॥ परै निशाना पूरशब्द पर ता सँग कौन लड़ैया ज्वान ५६ सुनिकै बातें ये ताहर की बोला तुरत बनाफरराय ॥ लड़ै मरैका कछु डर नाहीं यहही धर्म सनातन भाय ५७ रीछ बाँदरन सँग में लैके लङ्का विजय कीन भगवान ॥ ग्वालन बालन सँगमा लैके कंसै हना कृष्ण बलवान ५८ काह हकीकति है दिल्ली कै चलिकै बिल्ली देउँ बनाय ॥ पौर खशभिल्ली दिल्ली जाई किल्ली तुरतै देउँ नवाय ५९