आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 208, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माका बिवाह । २०३ ७ कैसो दिल्ली में गिल्ली सम पिल्ली पूत पिथौरा राय ॥ लिल्ली घोड़िन के चढ़वैया लड़िहैं कौन तहाँपर भाय ६० चौंड़ा बोला तहँ मलखे ते चलिये जहाँ चंदेलोराय ॥ सुनिकै बातें ये चौंड़ा की तीनों अटे महल में जाय ६१ देखिकै सूरति मलखाने कै बोला मोहबे का सरदार ॥ हाल बतावो सब सिरसा को ओ बिरमा के राजकुमार ६२ हाथ जोरिकै मलखे बोले दादा मोहबे के महराज ॥ मनोकामना सब पूरण हैं तुम्हरीकृपा सुफल सबकाज ६३ टीका लाये ये दिल्ली सों मैं ब्रह्माका करों बिवाह ॥ यही कामना यक बाकी है साँची मानु कही नरनाह ६४ पाती दीन्ह्यो मलखाने ने बांचन लाग रजापरिमाल ॥ डसै भुवंगम लहरैं आवैं कहरन लाग तुरत नरपाल ६५ हाथ जोरिकै ऊदन बोले दादा मोहबे के महराज ॥ टेक न टारैं मलखे दादा तासों करे बनी यहु काज ६६ सुनिकै बातें ये ऊदन की बोले तुरत रजापरिमाल ॥ हाल बतावो सब मल्हनाको वाको बड़ो पियारो बाल ६७ मोहिं बुढ़ापा की लाठी है ब्रह्मा बड़ा पियारा मान ॥ नामी राजा दिल्लीवाला ठाकुर समरधनी चौहान ६८ टेक कठिनहै मलखाने कै पूरण यहौ हृदय विश्वाश ॥ जियब न देखें हम काहू कर सबकर होय वहाँपर नाश ६६ पढ़िकै चिट्ठी पृथीराज की हमरे गई करेजे हूक ॥ जानि बूझिकै जस मलखे की ऐसी करै कौन नर चूक ७० सवैया ॥ सुनिकै नृपबैन तबै बलऐन बोले मलखे ललिते अनखाई ।