भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 217, कुल 618 में से

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पृष्ठ 217

१६ आल्हखण्ड । २१२ भलो आपनो जो तुम चाहौ इकलो ब्रह्मा देउ पठाय ११ हमहूं जैबे त्यहि संगैमाँ तुम्हरे काज सिद्ध हैजायँ ॥ सुनिकै बातें ये माहिल की मल्हना बोली मन हर्षाय १२ कहा तुम्हारो हम टारब ना भैया उरई के सरदार ॥ इकलो ब्रह्मा तुम लै जावो जामें होय नहीं तहँ मार १३ माहिल बोले फिरि मल्हनाते बहिनी मानो कही हमार ॥ चोरी चोरा काम निकालो नाकछु रीतिभांति की ब्यार १४ यह मन भायगई मल्हना के चुप्पे पलकी लीन मँगाय ॥ ब्रह्माठाकुर को बुलवायो औ पलकीमों दीन बिठाय १५ लैकै पलकी माहिल चलिभे ऊदन अटा तहाँ पर आय ॥ हाल जानिकै सब माहिल को चुप्पै धावन लीन बुलाय १६ लिखिकै चिट्ठी मलखाने को ऊदन तुरतै दीन पठाय ॥ चिट्ठी पढ़िकै मलखाने ने औ सुलखेको लीन बुलाय १७ कहि समुझायो सब सुलखेको सोऊ चला बेगिही धाय ॥ जायकै पकरयो सो माहिलको तुरतै कैद लीन करवाय १८ लैकै पलकी औ माहिल को सिरसागढ़ै पहुँचा आय ॥ बाँधि जँजीरन फिरि माहिलको फाटक पास दीन बैठाय १६ ऊदन चलिभे फिरि महलनको मल्हनै शीश झुकावा जाय ॥ हाथ जोरिकै ऊदन बोले माता साँच देयँ बतलाय २० माहिल मामा की बातन में इकलो ब्रह्मा दियो पठाय ॥ कुशल न होइहै तहँ ब्रह्माकी साँची बात कहैं हम माय २१ इतना कहिकै ऊदन चलिभे दशहरिपुरै पहुँचे आय ॥ कही हकीकति सब आल्हासों ऊदन बार बार समुझाय २२ चिट्ठी लिखिकै मलखाने ने औ परिमालै दीन जनाय ॥

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य) · पृष्ठ 217, कुल 618 में से · BharatKosha