भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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पृष्ठ 218

ब्रह्माका विवाह । २१३ १७ नेवता पठवो सब राजन को यहँहीं कुँवाँ बियाहैं माय २३ धायकै चिट्ठी मलखाने की सोई कीन रजापरिमाल ॥ गायके नेवता परिमालिक का आये सबै तहाँ नरपाल २४ तम्बू गड़िगे महराजन के झण्डा आसमान फहरायँ ॥ सुनवाँ बोली हाँ ऊदन ते तुम सुनिलेउलहुरवाभाय २५ ब्याह नगीचे है ब्रह्माका ना मोहबे का भयो तयार ॥ काह तुम्हारे मनमाँ ब्यापी देवर बेंदुल के असवार २६ सुनिकै बातें ये भौजी की बोले उदयसिंह सरदार ॥ हम नहिं जावैं अब मोहबे का भौजी मानों कही हमार २७ सुनिकै बातें ये ऊदन की सुनवाँ कहे बचन मुसुकाय ॥ दूध पियायो मल्हना रानी सेयो तुम्हें बनाफरराय २८ तुम्हें न चाहिये अस बघऊदन धोखा देउ समय पर आय ॥ धोखो दीन्हो माहिल मामा मलखे कैद लीन करवाय २६ कुशल आपने सब लड़काकी चाहैं सदा लहुरवा भाय ॥ को जगरक्षक है जननी सम ऊदन काह गये बौराय ३० करो तयारी अब भैया सँग मानो कही बनाफरराय ॥ इतना सुनिकै ऊदन चलिभे आल्है खबरिजनायोजाय ३१ बातें सुनिकै बघऊदन की आल्हा लश्करलियोसजाय ॥ बैठे हाथी आल्हा ठाकुर मनमें सुमिरि शारदामाय ३२ चढ़ा बेंदुला की पीढ़ी पर नाहर उदयसिंह सरदार ॥ दशहरिपुरवा ते चलिकै फिरि पहुंचे मोहबे के दरबार ३३ खातिर कीन्ह्यो परिमालिक ने दोऊ भाय बैठि शिरनाय ॥ भई तयारी फिर सिरसा की सबकोउ अटे तहाँपर जाय ३४ गई पालकी तहँ मल्हना की सिरसा भीर भई अधिकाय ॥