आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माका बिवाह । २१५ १६ बातें सुनिकै मलखाने की रूपना हाथजोरि शिर नाय ४७ उत्तर दीन्ह्यो मलखाने को मानो कही बनाफरराय ॥ नैनागढ़ भुन्नागढ़ नाहीं ह्याँपर बसै पिथौराराय ४८ लौटब मुशकिल है दिल्ली ते पिरथी मूड़ लेइ कटवाय ॥ औरो बारी हैं मोहेबे के तिनका आप देयँ पठवाय ४६ बातें सुनिकै ये रुपना की बोले उदयसिंह सरदार ॥ तेहा राखो रजपूती का बाँधो सदा ढाल तलवार ५० जौन गोसइयाँ पैदा कीन्ह्यो सोई सदा बचावनहार ॥ बातें सुनिकै उदयसिंह की रूपन बोला बचन उदार ५१ घोड़ा पावैं हरनागर को औ मलखे कि ढाल तलवार ॥ ऐपनवारी हम लै जावैं लावैं नहीं नेकहू बार ५२ सुनिकै बातें ये रूपन की मलखे दीन ढाल तलवार ॥ ऐपनवारी रूपन लैकै हरनागर पर भयो सवार ५३ माथनाय कै सब क्षत्रिन को तुरतै कूच दीन करवाय ॥ पिरथी केरे फिर फाटकपर रूपन तुरत पहूंचा जाय ५४ तब ललकारा दरबानी ने बारी बड़ो के असवार ॥ कहाँते आयो औ कहँ जैहो ताहर समरथ रावरे क्यार ५५ सुनिकै बातें द्वारपाल्जादे रूपन पास बचन ततकाल ॥ आई बरातें हैं मोहेंबे के फाटकपार निकसजापरिमाल ५६ ब्याहन आये हैं ब्रह्माको रूपनवारी नाम हमार ॥ ऐपनवारी हम लाये हैं चाहिये नेग म्हार अब द्वार ५७ सुनिकै बातें ये रूपन की बोला द्वारपाल त्यहिबार ॥ नेगु तुम्हारो का द्वारे का बोलो घोड़े के असवार ५८ सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन कहा बचन ललकार ॥