भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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उदयसिंहका बिवाह । २४७ ६ माली आवा जब बगिया ते तबसब हाल कहे समुझाय ७६ देवा बोला हाँ ऊदन ते अब रँग और परै दिखराय ॥ काहे अटक्यो तुम नरवर में साँचे हाल देव बतलाय ८० बातें सुनिकै ये देवा की बोला उदयसिंह सरदार ॥ फुलवा बेटी जो नरपति की तामें लाग्यो चित्त हमार ८१ कीनि प्रतिज्ञा हम अपने मन साँची तुम्हें देयँ बतलाय ॥ नैनन दीखे बिन फुलवा को ना हम धरब अगाड़ीपाँय ८२ सुनिकै बातें ये ऊदन की देवा बोला बचन बनाय ॥ ऐसी करिहौ जो बघऊदन तौ सब जैहैं काम नशाय ८३ घोड़ खरीदैन को आये तुम नरवर नैन खरीदे आय ॥ काह बतैहौ तुम राजा ते सोऊ कहो लहुरवाभाय ८४ तुमका सौंप्यो महराजा म्हिँ ऊत तुँकाह गयो बौराय ॥ तनिक मिहिरिया के देखै का ऊमफुलदेहौ लाज गवाँय ८५ अबै न बिगरा कछु बघऊदन ह्याँ ते कूच देव करवाय ॥ सुनिकै बातें ये देवा की बोला फेरि बनाफरराय ८६ मोहिं भरोसा है शारद को देवा मैनपुरी चौहान ॥ घोड़ खरीदन फिरि हम जैहैं करिहैं कुशलमोरिभगवान ८७ पै मन अटको है फुलवा में हटको मानै नहीं हमार ॥ खटको भटको पटको झटको सोवो आज यहाँ सरदार ८८ इतना कहतै बघऊदन के दोऊ नैन गये अलसाय ॥ देवा ऊदन दोऊ सोये चकरन पहरादीन बिठाय ८६ सोयकै जागे जब बघऊदन प्रातःक्रिया कीन हर्षाय ॥ फेरिकै पहुँचे मालिनि घरमाँ मालिनि हरवा रही बनाय ६० ऊदन बोले तहँ मालिनि सौं हिरिया भौजी बात बनाय ॥